

दिल्ली : गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए दिल्ली पुलिस ने इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सनग्लास को अपने नए तकनीकी हथियार के रूप में शामिल किया है। यह एआई सनग्लास न केवल अपराधियों की पहचान करने में मदद करेगा, बल्कि किसी व्यक्ति के पास धातु से बने हथियार होने की जानकारी भी तुरंत देगा। छद्मवेश में आने वाले अपराधियों की असली पहचान उजागर करने में भी यह तकनीक सक्षम है।
दिल्ली पुलिस का दावा है कि पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार ये एआई सनग्लास भविष्य में अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण साधन साबित होंगे। गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी में किसी भी तरह की आतंकी या अलगाववादी घटना को रोकने के लिए दिल्ली को पहले ही त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। इस अवसर पर करीब 10,000 दिल्ली पुलिसकर्मियों को सुरक्षा ड्यूटी में तैनात किया गया है।
मेटल डिटेक्टर और सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ इस बार एआई सनग्लास को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया है। इन सनग्लास का डाटाबेस मोबाइल फोन में संग्रहीत रहता है और ये इंटरनेट से जुड़े नहीं होते। किसी भी मोबाइल डिवाइस के माध्यम से इन्हें संचालित किया जा सकता है। लंबे समय तक परीक्षण के बाद दिल्ली पुलिस को भारत में पहली बार इस तकनीक के उपयोग की अनुमति मिली है।
इन एआई सनग्लास के डाटाबेस में पिछले 20 वर्षों के अपराधियों की तस्वीरें और उनके आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह तकनीक पुराने अपराधियों की पहचान करने में सक्षम है और यह भी तुरंत पता लगा सकती है कि समय के साथ किसी अपराधी के चेहरे में क्या बदलाव आए हैं। यदि कोई अपराधी मास्क पहनकर या किसी अन्य भेष में आता है, तब भी उसकी पहचान संभव है।
दिल्ली पुलिस के पास इस समय गंभीर अपराधों से जुड़े लगभग 65,000 अपराधियों का डाटाबेस मौजूद है। यदि इनमें से कोई भी व्यक्ति 26 जनवरी को दिल्ली में प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो उसकी स्कैन की गई छवि तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम और संबंधित अधिकारियों तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति आग्नेयास्त्र, चाकू या किसी अन्य धातु की वस्तु लेकर प्रवेश करने का प्रयास करता है, तो यह एआई सनग्लास तुरंत उसे चिन्हित कर देगा।