

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : पोर्ट ब्लेयर स्थित माननीय विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) उमेश सिंह शर्मा ने 9 जुलाई 2026 को वर्ष 2012 के एक गंभीर दुष्कर्म मामले में आरोपी लिटल अंडमान निवासी परीतोष सरकार को दोषी ठहराते हुए कठोर कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने वर्ष 2012 में अपनी लगभग नौ वर्ष की सौतेली पुत्री के साथ दुष्कर्म किया था। घटना का खुलासा उस समय हुआ जब पीड़िता ने शोर मचाया, जिससे आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। इसके बाद मामले की सूचना संबंधित पुलिस थाने को दी गई, जहां आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 376 तथा 506 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच उप निरीक्षक आदित्य नारायण द्वारा की गई। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में कुल 14 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। सुनवाई के उपरांत माननीय न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को अपराध का दोषी पाया और भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1) के अंतर्गत उसे दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। इसके अतिरिक्त न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के अंतर्गत आरोपी को दो वर्ष के कठोर कारावास तथा 10,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना जमा न करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पीड़िता के पुनर्वास की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए माननीय न्यायालय ने उसके पुनर्वास, शिक्षा तथा भविष्य के भरण-पोषण के लिए छह लाख रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान करने का भी निर्देश दिया। अपने निर्णय में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है तथा ऐसे मामलों में कठोर दंड न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने का माध्यम है, बल्कि समाज में ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने का भी संदेश देता है। राज्य सरकार की ओर से इस मामले का सफल संचालन विशेष लोक अभियोजक ए. एस. जीनू ने किया।