

ढाका : बांग्लादेश में एक बार फिर हिंदू समुदाय के एक व्यक्ति पर हिंसक हमला किया गया है। 50 वर्षीय खोकन दास पर 31 दिसंबर को शरियतपुर ज़िले में एक हिंसक समूह ने जानलेवा हमला किया, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की ताज़ा कड़ी मानी जा रही है।
आरोपों के अनुसार, जब खोकन दास अपने घर लौट रहे थे, तब एक भीड़ ने उन पर हमला कर उनके पेट के निचले हिस्से में चाकू मारा, उन्हें बेरहमी से पीटा और पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने पास के एक तालाब में कूदकर किसी तरह अपनी जान बचाई। हमले के बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई, जिसके चलते उन्हें ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
चरमपंथी और कट्टरपंथी तत्व :-
- कुछ कट्टर इस्लामी समूह अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं।
- ये लोग धर्म का इस्तेमाल हिंसा को सही ठहराने के लिए करते हैं, जबकि यह इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ है।
राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता संघर्ष :-
- बांग्लादेश में जब राजनीतिक संकट या सत्ता परिवर्तन होता है, तब अल्पसंख्यक अक्सर "soft target" बन जाते हैं।
- कई बार हिंसा का इस्तेमाल डर फैलाने या ध्यान भटकाने के लिए किया जाता है।
कानून-व्यवस्था की कमजोरी
- कई मामलों में अपराधियों को सज़ा नहीं मिलती, जिससे उन्हें दोबारा हिंसा करने का हौसला मिलता है।
- पुलिस कार्रवाई देर से या कमजोर होती है।