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2026 में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो सकती है ईंधन सब्सिडी
नई दिल्ली :
ईरान युद्ध और अन्य वैश्विक संकटों के बीच बढ़ती ऊर्जा कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं से दूर रखने की सरकारों की क्षमता अब सीमित होती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में ईंधन सब्सिडी पर सरकारों का खर्च 2026 में 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक पहुंच सकता है।संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के अध्ययन के अनुसार, खाद्य और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर कम करने के लिए सरकारों की ओर से किए जा रहे नीतिगत हस्तक्षेप लगातार महंगे और मुश्किल होते जा रहे हैं। बढ़ती उधारी लागत ने सरकारी बजट पर दबाव बढ़ाया है, जबकि ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक तनाव से अनिश्चितता बनी हुई है।रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान युद्ध समेत विभिन्न संकटों के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी आने पर सरकारों को उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी बढ़ानी पड़ रही है। हालांकि, लंबे समय तक इस तरह की सहायता जारी रखना वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, अल नीनो की स्थिति भी वैश्विक खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ा सकती है। अध्ययन में मौजूदा मौसम संबंधी परिस्थितियों के चलते रिकॉर्ड स्तर के मजबूत अल नीनो की आशंका जताई गई है। इससे खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा और खाद्य कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकारों के पास उपलब्ध वित्तीय गुंजाइश पहले की तुलना में कम हो रही है। ऐसे में आने वाले समय में महंगी ऊर्जा से उपभोक्ताओं को राहत देने और सरकारी वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी।

