हाथी मानव संघर्ष रोकने को आरन्यक ने ग्रामीणों से किया संवाद

हाथी मानव संघर्ष रोकने को आरन्यक ने ग्रामीणों से किया संवाद

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तमुलपुर के चार गांवों में सुरक्षा उपायों पर चर्चा

अंधेरे में निगरानी के लिए सर्चलाइट की पहचान

गुवाहाटी:

असम के पश्चिमी क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच वन्यजीव संरक्षण संगठन आरन्यक ने ग्रामीणों के साथ संवाद कर संघर्ष को कम करने के उपायों पर चर्चा की। फसल कटाई के मौसम में हाथियों और इंसानों के बीच टकराव की आशंका बढ़ने के मद्देनजर संगठन ने तमुलपुर जिले के चार परियोजना गांवों के निवासियों को शामिल करते हुए जागरूकता एवं परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य स्थानीय समुदायों की भागीदारी से हाथियों के हमलों के जोखिम को कम करना और इंसानों तथा वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना है।

संतिपुर और अभयपुर में हुए कार्यक्रम

आरन्यक ने 9 अक्टूबर को तमुलपुर जिले के संतिपुर और अभयपुर गांवों में दो सामुदायिक परामर्श एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इसमें चार परियोजना गांवों के ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रमों में प्रस्तावित मानव-हाथी संघर्ष शमन उपायों को लागू करने से पहले स्थानीय लोगों की राय ली गई और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को समझने का प्रयास किया गया।ग्रामीणों ने उन स्थानों की पहचान करने में सहयोग दिया, जहां मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए आवश्यक उपकरण लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा, ऐसे परिवारों और लोगों की पहचान की गई, जिन्हें रात के समय सुरक्षित आवागमन करने अथवा सामुदायिक भूमि पर हाथियों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए सर्चलाइट की आवश्यकता हो सकती है।इन बैठकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रस्तावित उपायों के क्रियान्वयन से पहले ग्रामीणों को पूरी जानकारी मिले और स्थानीय समुदायों की सहमति तथा सहभागिता के साथ आगे की कार्रवाई की जा सके। दोनों कार्यक्रमों में करीब 110 लोगों ने भाग लिया।

हाथियों और इंसानों की सुरक्षा पर जोर

आरन्यक की एलीफेंट रिसर्च एंड कंजर्वेशन डिवीजन की परियोजना अधिकारी अनुष्का सैकिया ने कार्यक्रमों का संचालन किया। इसी विभाग की परियोजना अधिकारी अभिलाषा बोरुआ ने हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी सह-अस्तित्व से संबंधित जागरूकता सत्र आयोजित किए। संगठन के क्षेत्रीय कर्मचारियों रूपम गोयारी, अभिजीत सैकिया और सचिन बसनेट ने कार्यक्रमों के संचालन में सहयोग दिया। तमुलपुर जिले की कुमारिकाटा रेंज के वनकर्मी भी कार्यक्रमों में शामिल हुए।यह पहल आईयूसीएन एसएससी सेंटर फॉर स्पीशीज सर्वाइवल के एशियन एलीफेंट रैपिड रिस्पांस 2026 अनुदान के सहयोग से तथा असम राज्य वन विभाग के साथ मिलकर की गई।

हाथियों और इंसानों की मौत से बढ़ी चिंता

क्षेत्र में हाल की घटनाओं ने मानव-हाथी संघर्ष की गंभीरता को उजागर किया है। आरन्यक के अनुसार, 18 सितंबर को तमुलपुर और 6 अक्टूबर को पड़ोसी बक्सा जिले में दो वयस्क हाथियों की अलग-अलग घटनाओं में कथित रूप से जानबूझकर बिजली का करंट दिए जाने से मौत हुई। वहीं, 25 सितंबर को तमुलपुर में एक अकेले जंगली हाथी के साथ मुठभेड़ के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।इन घटनाओं के मद्देनजर संगठन ने फसल कटाई के मौसम में ग्रामीणों की सुरक्षा, हाथियों के संरक्षण और संघर्ष की रोकथाम के लिए सामुदायिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। ग्रामीणों से मिले सुझावों के आधार पर प्रस्तावित सुरक्षा उपायों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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