देश/विदेश
मणिपुर में टेलीग्राम पर अश्लील सामग्री बेचने के आरोप में 13 गिरफ्तार
‘ऑपरेशन डिग्निटी’ के तहत पुलिस की कार्रवाई
14 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त
इंफाल :
मणिपुर पुलिस ने महिलाओं की सहमति के बिना उनकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो प्रसारित करने तथा उनसे कथित तौर पर पैसे कमाने के मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में कानून से संघर्षरत एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, यह सामग्री टेलीग्राम के विभिन्न चैनलों और समूहों के माध्यम से साझा की जा रही थी। जांच के दौरान बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) के प्रसार से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। पुलिस ने इस मामले में ‘ऑपरेशन डिग्निटी’ के नाम से जांच शुरू की है। अधिकारियों को टेलीग्राम चैनलों के संचालकों और उपयोगकर्ताओं द्वारा महिलाओं की निजी तस्वीरों एवं वीडियो को साझा करने, बेचने और उनसे कमाई करने की विश्वसनीय सूचना मिली थी। इसके बाद मोइरांग पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस ने जांच के सिलसिले में 14 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया है। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के जरिए कथित नेटवर्क के दायरे, सामग्री के प्रसार में शामिल लोगों और इससे जुड़े वित्तीय लेनदेन का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
चार जिलों से पकड़े गए आरोपित
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए 13 लोगों में 12 वयस्क हैं, जिनकी उम्र 18 से 34 वर्ष के बीच है। एक आरोपित नाबालिग है, जिसके मामले को किशोर न्याय से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत निपटाया जाएगा। गिरफ्तार वयस्क आरोपितों में एन. राजेश सिंह उर्फ मैपाकचाओ (21), एच. धनजीत सिंह उर्फ टैसन (19), एस. सापाबा सिंह (19), थ. कैवेंडिश सिंह उर्फ इंगोचा (21), एच. रोजित सिंह (19), एम. क्लिंटन सिंह (28), ख. बिपिन सिंह (31), एस. सिम्पसन सिंह (34), ए. आरिया सिंह (24), एस. अलेक्जेंडर सिंह (31), के. राकेश सिंह (18) और छ. रॉबर्ट सिंह (27) शामिल हैं। पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, आरोपित मणिपुर के बिष्णुपुर, इंफाल पश्चिम, काकचिंग और थौबल जिलों से संबंधित हैं। वयस्क आरोपितों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित स्थानीय पुलिस थानों को सौंपा गया है।
आर्थिक लेनदेन की भी हो रही जांच
पुलिस इस मामले में केवल तस्वीरों और वीडियो के प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित तौर पर इससे अर्जित धन और संबंधित वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है। जांचकर्ताओं को यह पता लगाना है कि सामग्री को किन लोगों ने साझा किया, इसे प्रसारित करने वाले टेलीग्राम चैनलों का संचालन कौन कर रहा था और क्या इस गतिविधि से जुड़े अन्य लोग भी शामिल हैं। जब्त मोबाइल फोन और लैपटॉप की फोरेंसिक जांच से डिजिटल साक्ष्य जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क के माध्यम से कितनी महिलाओं को निशाना बनाया गया और क्या अन्य पीड़ितों की पहचान की जा सकती है।
महिलाओं की निजता और ऑनलाइन सुरक्षा पर सवाल
यह मामला डिजिटल मंचों पर महिलाओं की निजता, सहमति और सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठाता है। किसी व्यक्ति की निजी तस्वीर या वीडियो उसकी सहमति के बिना साझा करना, खासकर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल करना, पीड़ितों की गरिमा और निजता को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। बाल यौन शोषण सामग्री का प्रसार भी गंभीर आपराधिक मामला है। पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य कथित तौर पर ऐसी सामग्री के प्रसार में शामिल नेटवर्क का पता लगाना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना है। हालांकि, गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी। मणिपुर पुलिस ने मामले की जांच जारी रहने की जानकारी दी है। फिलहाल जांच का मुख्य फोकस डिजिटल नेटवर्क की पहचान, पैसों के लेनदेन का पता लगाने और संभावित अतिरिक्त पीड़ितों की पहचान करने पर है।

