नागालैंड में महिला से दुष्कर्म के आरोप पर प्रदर्शन

नागालैंड में महिला से दुष्कर्म के आरोप पर प्रदर्शन

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महिला संगठनों ने तेज जांच और त्वरित सुनवाई की मांग उठाई

सार्वजनिक परिवहन में जीपीएस और चालकों की जांच अनिवार्य करने की अपील

कोहिमा:

नागालैंड के कोहिमा जिले के चिएफोबोजू कस्बे में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को नेरहेमा महिला संगठन (एनडब्ल्यूओ) और अन्य स्थानीय संगठनों ने महिला से कथित दुष्कर्म के मामले में न्याय की मांग को लेकर शांतिपूर्ण रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और त्वरित सुनवाई की मांग की। रैली में विभिन्न महिला संगठनों, युवा संगठनों और स्थानीय नागरिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

नेरहे मॉडल गांव से निकली रैली

प्रदर्शनकारी ‘हमें न्याय चाहिए’ लिखे बैनर लेकर नेरहे मॉडल गांव से चिएफोबोजू कस्बे तक पहुंचे। वहां टाउन काउंसिल कार्यालय में संक्षिप्त कार्यक्रम आयोजित किया गया। एनडब्ल्यूओ की अध्यक्ष विदेनुओ त्सुरहो ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं के खिलाफ ऐसे कथित अपराधों से समाज में असुरक्षा की भावना बढ़ती है। उन्होंने लोगों से महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए एकजुट होने की अपील की।इसके बाद प्रदर्शनकारी अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच, जल्द आरोपपत्र दाखिल करने और कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।

17 अक्टूबर की घटना को लेकर आरोप

संगठनों के अनुसार, यह घटना 17 अक्टूबर को हुई थी। आरोप है कि कोहिमा से चिएफोबोजू जा रही एक महिला निजी टैक्सी में यात्रा कर रही थी। कथित तौर पर चालक ने निर्धारित गंतव्य पर वाहन नहीं रोका और रास्ता बदलकर महिला को वाहन में बंद रखा। इसके बाद महिला ने चालक पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया।मामले में चिएचामा गांव निवासी निजी टैक्सी चालक रुओकुओतुओली रüप्रेओ का नाम सामने आया है। घटना के संबंध में चिएफोबोजू पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

पीड़िता को सहायता और मुआवजे की मांग

ज्ञापन में पीड़िता और उसके परिवार को तत्काल चिकित्सकीय सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की गई। संगठनों ने यह भी अपील की कि कोई व्यक्ति या संस्था आरोपी को बचाने, मामले को प्रभावित करने अथवा समझौते का दबाव बनाने की कोशिश न करे। उन्होंने पीड़िता की पहचान और निजता सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया। संगठनों ने आम लोगों और मीडिया से उसकी पहचान उजागर करने वाली जानकारी, तस्वीर या अन्य निजी विवरण साझा नहीं करने की अपील की।

सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा पर जोर

महिला संगठनों ने सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए टैक्सी चालकों की नियमित अल्कोहल जांच और सभी सार्वजनिक परिवहन वाहनों में जीपीएस लगाने की मांग की। उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्थाओं की निगरानी भी सुनिश्चित होनी चाहिए। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि न्याय मिलने में देरी हुई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने नागालैंड के नागरिकों, छात्र संगठनों और महिला समूहों से पीड़िता के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की।
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