नागालैंड में निजी डॉक्टरों को टीबी के नए दिशानिर्देशों के पालन की सलाह

नागालैंड में निजी डॉक्टरों को टीबी के नए दिशानिर्देशों के पालन की सलाह

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इलाज में मनमानी से बढ़ सकता है ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी का खतरा

कोहिमा :

नागालैंड में तपेदिक (टीबी) के मामलों की संख्या लगातार बने रहने के बीच स्वास्थ्य विभाग ने निजी चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से सरकार द्वारा निर्धारित उपचार प्रोटोकॉल तथा नवीनतम दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील की है। नेशनल ट्यूबरकुलोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम (एनटीईपी) की ओर से सोमवार को कोहिमा में निजी चिकित्सकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य टीबी की रोकथाम, जांच और उपचार से संबंधित नवीनतम दिशा-निर्देशों की जानकारी देना था। कार्यक्रम में कोहिमा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) टी. येतोवी तुच्चू ने कहा कि टीबी उन्मूलन के प्रयासों को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं का निर्धारित उपचार प्रोटोकॉल से अद्यतन रहना जरूरी है। उन्होंने सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।तुच्चू ने बताया कि टीबी के अनेक मरीज निजी क्लीनिकों, अस्पतालों और डॉक्टरों से उपचार कराते हैं। ऐसे में बीमारी की रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन में निजी चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने उनसे अपने स्तर पर अलग-अलग उपचार पद्धतियां अपनाने के बजाय सरकार के निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप इलाज करने का आग्रह किया। उन्होंने आगाह किया कि उपचार के तरीकों में असंगति से मरीजों के स्वास्थ्य और व्यापक जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

इलाज बीच में छोड़ने से बढ़ता है खतरा

कार्यक्रम में टीबी मरीजों को उपचार का पूरा कोर्स पूरा कराने के लिए परामर्श देने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को नियमित उपचार के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों के कारण कुछ मरीज शुरुआती राहत मिलने के बाद ही दवाएं लेना बंद कर देते हैं। इस तरह बीच में इलाज छोड़ने से बीमारी दोबारा उभरने और ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है। ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी में बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया पर सामान्य दवाओं का असर कम हो जाता है, जिससे उपचार अधिक जटिल हो सकता है।

जरूरतमंद मरीजों को सरकारी केंद्रों में भेजने की अपील

निजी चिकित्सकों से मरीजों को उपचार का पूरा कोर्स करने, दवाओं के नियमित सेवन और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के महत्व के बारे में समझाने को कहा गया। साथ ही, जिन मरीजों को आर्थिक सहायता, अतिरिक्त परामर्श या अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत हो, उन्हें उपयुक्त सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में भेजने की सलाह दी गई। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकारी और निजी स्वास्थ्य क्षेत्र के बीच सहयोग, एकरूप उपचार व्यवस्था और मरीजों की नियमित निगरानी जरूरी है।
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