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ग्रामीण बैंकिंग में सुधार के लिए वित्त मंत्रालय ने उत्कर्ष एजेंडा जारी किया
अगरतला :
देश में ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था को अधिक आधुनिक, प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने ‘उत्कर्ष–आरआरबी सुधार एजेंडा वित्त वर्ष 2026-27’ की शुरुआत की है। इस पहल का लक्ष्य क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) की कार्यक्षमता बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच का विस्तार करना और किसानों, छोटे कारोबारियों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बैंकिंग व्यवस्था से अधिक मजबूती से जोड़ना है। इस राष्ट्रीय पहल में त्रिपुरा ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने भी भाग लिया। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय लोहिया ने इस सुधार एजेंडे का अनावरण किया। उन्होंने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को मजबूत बनाने और देश के विकास संबंधी व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप उनकी भूमिका बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह पहल विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य से जुड़ी है और इसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में बैंकों की भूमिका को और प्रभावी बनाना है।
तकनीक और बेहतर सेवाओं पर रहेगा जोर
‘उत्कर्ष’ एजेंडे के तहत क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की परिचालन क्षमता में सुधार, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके माध्यम से बैंकों को ग्रामीण क्षेत्रों की बदलती वित्तीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की योजना है। ग्रामीण भारत में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक लंबे समय से किसानों, स्वरोजगार करने वाले लोगों, छोटे उद्यमियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को औपचारिक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में इन बैंकों की कार्यप्रणाली को अधिक कुशल बनाना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस सुधार कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है। बैंकिंग सेवाओं से वंचित या सीमित पहुंच वाले लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने के साथ संस्थागत दक्षता और दीर्घकालीन स्थिरता को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
किसानों और छोटे कारोबारियों को मिल सकता है लाभ
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों, छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को समय पर ऋण तथा अन्य बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। नई सुधार पहल से इन सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने की उम्मीद है। बेहतर बैंकिंग सेवाएं ग्रामीण परिवारों को बचत, ऋण और अन्य वित्तीय जरूरतों के प्रबंधन में सहायता दे सकती हैं। इसके साथ ही छोटे कारोबारियों को अपने व्यवसाय के विस्तार और स्वरोजगार के अवसरों को विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस एजेंडे के तहत अलग-अलग बैंकों के लिए निर्धारित विशिष्ट लक्ष्य, समयसीमा और क्रियान्वयन संबंधी विस्तृत प्रावधानों का उल्लेख उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं किया गया है।
त्रिपुरा ग्रामीण बैंक की भागीदारी महत्वपूर्ण
इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में त्रिपुरा ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह की भागीदारी राज्य के ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में देशभर के बैंकिंग विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था के आधुनिकीकरण और पुनर्गठन के लिए साझा दृष्टिकोण विकसित करना है। त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्य में ग्रामीण बैंक किसानों, छोटे उद्यमियों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में तकनीकी सुविधाओं के विस्तार और सेवा वितरण में सुधार से ग्रामीण ग्राहकों को लाभ पहुंचने की संभावना है।
विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ी पहल
वित्त मंत्रालय की यह पहल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता के अंतर को कम करने के व्यापक उद्देश्य से जुड़ी है। इसके जरिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को आर्थिक विकास, आजीविका के अवसरों के विस्तार और वित्तीय समावेशन का अधिक प्रभावी माध्यम बनाने की परिकल्पना की गई है। ‘उत्कर्ष–आरआरबी सुधार एजेंडा 2026-27’ की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित सुधारों को किस तरह लागू किया जाता है और उनका लाभ ग्रामीण परिवारों, किसानों तथा छोटे कारोबारियों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है।

