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उरा अकादमी ने दिवंगत साहित्यकारों को सम्मानित किया
प्रो. डॉ. डी. कुओली और कवि मेदो विजो को मरणोपरांत पुरस्कार
तीसरे लेखक-कवि सम्मेलन में दस पुस्तकों का विमोचन, नागा साहित्य और संस्कृति के संरक्षण पर जोर
दीमापुर:
नागालैंड की उरा अकादमी ने साहित्य और कविता के क्षेत्र में योगदान देने वाले दिवंगत साहित्यकार प्रोफेसर डॉ. डी. कुओली और कवि मेदो विजो को मरणोपरांत उरा अकादमी पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया। शुक्रवार को बादी स्थित रेव. बेलीएउ हॉल में आयोजित अकादमी के तीसरे लेखक एवं कवि सम्मेलन में दोनों साहित्यकारों के परिजनों को पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रत्येक पुरस्कार के साथ एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति-पत्र दिया गया। अकादमी के सचिव डॉ. मेटुओ लीजेत्सु ने पुरस्कार प्रदान किए।
साहित्यिक योगदान के लिए मरणोपरांत सम्मान
सम्मेलन में लेखकों, कवियों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य नागा साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना था।उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता उरा अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष दासो पाफिनो ने की। अकादमी के बोर्ड निदेशक रेव. ख्रोत्सो मेरो ने बाइबिल पाठ और प्रार्थना कराई, जबकि बोर्ड निदेशक थोसे क्राहो ने स्वागत भाषण दिया। डॉ. मेडोंगुली त्सेइखानुओ और साहू पेसेयी ने गीत प्रस्तुत किए।
दस नई पुस्तकों का विमोचन
सम्मेलन में विभिन्न लेखकों की दस पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इनमें डॉ. शुरहोजेली लीजेत्सु की चार पुस्तकें—‘केविथु ड्जे’, ‘वेलुओजौ पेयु-उ’, ‘थेड्जे केड्जु’ और ‘केरुसुओ केहौ डाइकोउरेई’ शामिल हैं।इसके अलावा ख्रिबेतुओनुओ पिएनयी की ‘राजौ केखरी’, नेइजित्सो मेक्रिसुह की ‘तेनिमिया किया मु केल्हौझो’, वेत्सुनो रिंगा और रुओकुओल्हौनुओ पेन्यु द्वारा अनूदित ‘केरु-थेनुनुओयो मु केदिनुओयो’, म्हालेली विमेरा की ‘रीसोमा रीइना नु नागामिया सेइये न्यी ड्जे’ तथा म्हासिवितो नगुलिएझु की ‘ए केजिउ एंड यू केनेई गेजो’ शामिल हैं। इन पुस्तकों से नागा समाज के साहित्य, परंपराओं और स्थानीय ज्ञान को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
शेक्सपियर के अनुवाद पर चर्चा
डॉ. शुरहोजेली लीजेत्सु ने विलियम शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक ‘जूलियस सीजर’ के तेन्यिडिए अनुवाद ‘तेइकादो केदुखरी’ पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने अनुवाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इससे विश्व साहित्य को स्थानीय भाषा के पाठकों तक पहुंचाने और साहित्यिक दृष्टिकोण का विस्तार करने में मदद मिलती है।
लोक संगीत ने बढ़ाई कार्यक्रम की रौनक
सम्मेलन में पारंपरिक संगीत और लोकगीतों की प्रस्तुतियां भी हुईं। केनेइक्रिल नोस्वे और उनके साथियों तथा एम. मेगुओ-ओ और जुहिवोल क्वेहो ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। दूसरे सत्र की अध्यक्षता नागालैंड विश्वविद्यालय के तेन्यिडिए विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. ख्रीवोली कीहो ने की। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी गीत प्रस्तुत किए। अकादमी की लाइब्रेरी सलाहकार विजोन्यु लीजेत्सु ने साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों पर विचार रखे। सम्मेलन ने नागा भाषाओं, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने के लिए अकादमी की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

