

कोलकाता: महानगर में जनगणना के दौरान कई लोगों का पता नहीं चल पाने और अधूरी या गलत जानकारी दिए जाने के बाद अब बंद और परित्यक्त बताए गए घरों में एन्यूमरेटर दोबारा जाएंगे। राज्य के गृह सचिव ने आगामी शनिवार और रविवार को इन घरों में जाकर निवासियों की जानकारी जुटाने का निर्देश दिया है। साथ ही एन्यूमरेटरों की ओर से दर्ज कुछ सूचनाओं का दोबारा सत्यापन करने को भी कहा गया है।
जनगणना से जुड़े पोर्टल ‘सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ के आंकड़ों के अनुसार, कोलकाता में 16.5 प्रतिशत घरों को ‘परित्यक्त’ और 12.24 प्रतिशत को ‘बंद’ बताया गया है। एन्यूमरेटरों का दावा है कि इन घरों में जाने पर उन्हें निवासी नहीं मिले। वहीं, महानगर के केवल करीब 30 प्रतिशत लोगों ने ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन में हिस्सा लिया है।
सूत्रों के अनुसार, घर पर व्यक्ति नहीं मिलने की स्थिति में एन्यूमरेटर को संपर्क के लिए अपना फोन नंबर छोड़ना था। आरोप है कि कई मामलों में ऐसा नहीं किया गया। इससे काम के सिलसिले में दिनभर घर से बाहर रहने वाले कई लोग जनगणना प्रक्रिया से बाहर रह गए।
नवान्न को एन्यूमरेटरों द्वारा पोर्टल पर दर्ज कुछ जानकारियों में भी असंगतियां मिली हैं। इनमें मैनुअल स्कैवेंजिंग, खुले में शौच और केरोसिन जैसे ईंधन से खाना पकाने की जानकारी शामिल है। इन सूचनाओं का दोबारा सत्यापन जरूरी माना गया है।
दूसरी ओर, कुछ नागरिकों पर भी सेल्फ-एन्यूमरेशन के दौरान गलत जानकारी देने का आरोप है। बताया गया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पाने की आशंका में कुछ लोगों ने अपने वास्तविक निवास के बजाय किराये या किसी अन्य के घर में रहने की जानकारी दर्ज कराई।
जनगणना प्रक्रिया को इस बार डिजिटल किया गया है। 1 से 16 अगस्त तक नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन का अवसर दिया गया था। इसके बाद एन्यूमरेटर घर-घर जाकर दर्ज जानकारी का सत्यापन कर रहे हैं। जो लोग सेल्फ-एन्यूमरेशन में शामिल नहीं हुए, उनके परिवार की जानकारी भी जुटाई जा रही है। यह प्रक्रिया 14 सितंबर तक चलेगी, जबकि अंतिम जनगणना अगले वर्ष होगी।