‘निगलने’ को तैयार नदी! समुद्रगढ़ में रेलवे ट्रैक से महज 50 फीट दूर भागीरथी, बढ़ी चिंता

रेलवे ट्रैक
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बारिश और तेज बहाव के बीच लगातार हो रहा कटाव, स्थानीय लोगों को हावड़ा-कटवा रेल संपर्क प्रभावित होने का डर

पूर्व बर्धमान: पूर्व बर्धमान के पूर्वस्थली इलाके में भागीरथी नदी के बढ़ते कटाव ने रेलवे ट्रैक की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। समुद्रगढ़ स्टेशन के पास जालुई डांगा गांव में नदी और रेलवे लाइन के बीच की दूरी महज करीब 50 फीट रह गई है। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण यह दूरी और कम होती दिखाई दे रही है। हावड़ा-कटवा शाखा की महत्वपूर्ण रेलवे लाइन नदी के बेहद करीब से गुजरती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से भागीरथी के किनारे लगातार कटाव हो रहा है। नदी का पानी बढ़ने पर आसपास की जमीन जलमग्न हो जाती है और रेलवे ट्रैक के आसपास की मिट्टी के कटने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में भविष्य में ट्रैक के नीचे की मिट्टी धंसने की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, वर्ष 2000 की भीषण बाढ़ के दौरान नदी का पानी रेलवे लाइन तक पहुंच गया था। उस समय रेललाइन को नुकसान पहुंचा था और ट्रेन सेवाओं को भी रोकना पड़ा था। इसके बाद से ही इस इलाके को संवेदनशील माना जाता है।

करीब तीन साल पहले नदी कटाव रोकने के लिए किनारे पर जाल और बोल्डर लगाए गए थे। इससे कुछ हद तक कटाव पर नियंत्रण मिला, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि यह स्थायी समाधान नहीं है। हर साल बारिश के साथ नदी का जलस्तर और बहाव बढ़ता है और किनारे की मिट्टी धीरे-धीरे कटती रहती है।

जालुई डांगा के निवासियों का कहना है कि केवल बोल्डर डालकर समस्या का समाधान नहीं होगा। नदी कटाव रोकने के लिए वैज्ञानिक और स्थायी उपाय किए जाने चाहिए। लोगों ने राज्य और केंद्र सरकार से मिलकर जल्द कार्रवाई करने की मांग की है।

स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते नदी के कटाव को नहीं रोका गया तो आने वाले दिनों में हावड़ा-कटवा रेललाइन की सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ सकती है और रेल यातायात भी प्रभावित हो सकता है।

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