जनगणना में फिर पूछा जा रहा ‘घर में रेडियो है?’ का सवाल, ताजा हुईं बेतार की पुरानी यादें

जनगणना में फिर पूछा जा रहा ‘घर में रेडियो है?’ का सवाल, ताजा हुईं बेतार की पुरानी यादें
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काेलकाता : कभी घर-घर की पहचान रहा रेडियो आज भले ही मोबाइल और इंटरनेट के दौर में पीछे छूट गया हो, लेकिन जनगणना के दौरान पूछे जा रहे एक सवाल ने इसकी पुरानी यादें ताजा कर दी हैं। जनगणना के लिए तैयार किए गए प्रश्नपत्र में लोगों से पूछा जा रहा है कि उनके घर में रेडियो है या नहीं। हालांकि, ज्यादातर परिवारों के पास अब रेडियो नहीं है, लेकिन जिन कुछ घरों में यह पुराना बेतार यंत्र अब भी मौजूद है, उनके लिए यह महज एक उपकरण नहीं, बल्कि यादों से जुड़ी धरोहर है।

आकाशवाणी से महिषासुरमर्दिनी तक जुड़ी यादें

एक दौर था जब रेडियो से सुबह की शुरुआत होती थी। आकाशवाणी की खबरों के बाद नाटक, गीत और ‘गल्पदादु का आसन’ जैसे कार्यक्रम लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय थे। विश्व युद्ध, स्वदेशी आंदोलन, देश विभाजन और आजादी जैसे ऐतिहासिक दौर का रेडियो प्रत्यक्ष साक्षी रहा। उस समय इसकी लोकप्रियता इतनी थी कि कई जगहों पर शादी के दहेज में भी रेडियो दिया जाता था। बाद में महिषासुरमर्दिनी का प्रसारण बंगाली समाज की दुर्गापूजा से जुड़ी खास परंपरा बन गया।

दक्षिण बीरेशपल्ली में आज भी संभालकर रखा है रेडियो

मध्यग्राम नगरपालिका के 21 नंबर वार्ड में जनगणना का काम कर रहीं एन्यूमरेटर काकली बसु को करीब 50 घरों का सर्वे करने के बाद एक घर में रेडियो मिला। दक्षिण बीरेशपल्ली निवासी रूपाली मित्र के घर मौजूद यह रेडियो उनके ससुर ने खरीदा था। रूपाली के मुताबिक, उनके ससुर नियमित रूप से रेडियो सुनते थे और सिग्नल नहीं मिलने पर रेडियो को कान के पास ले जाकर बार-बार नॉब घुमाकर स्टेशन पकड़ने की कोशिश करते थे। उनके निधन के बाद भी परिवार ने रेडियो को संभालकर रखा है। महालया से पहले उनके पति रेडियो को दुकान पर ले जाकर उसकी जांच भी करवाते हैं।

आपदा के समय आज भी उपयोगी

रेडियो की अहमियत केवल पुरानी यादों तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक आपदा के दौरान जब मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बाधित हो जाती हैं, तब रेडियो संचार और सूचना के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। वेस्ट बंगाल हैम रेडियो के संपादक अंबरिश विश्वास के अनुसार, प्राकृतिक आपदा के समय संचार व्यवस्था बनाए रखने में रेडियो की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नई पीढ़ी को भी विभिन्न कार्यशालाओं के माध्यम से रेडियो वेब के महत्व के बारे में बताया जा रहा है।

मोबाइल और इंटरनेट के युग में रेडियो भले ही रोजमर्रा की जिंदगी से लगभग गायब हो गया हो, लेकिन कुछ घरों में आज भी सुरक्षित रखे ये पुराने सेट बीते दौर की आवाजों और यादों को जीवित रखे हुए हैं।

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