बारिश के बावजूद नहीं धुला प्रदूषण, कोलकाता में PM2.5 WHO की सीमा से ऊपर

अगस्त में देश के बड़े महानगरों में PM2.5 के औसत स्तर के मामले में कोलकाता दूसरे स्थान पर रहा
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गंगा को प्रदूषण से मुक्ति नहीं!
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: लगातार बारिश के बावजूद कोलकाता की हवा से प्रदूषण पूरी तरह साफ नहीं हो सका है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में शहर में औसत PM2.5 का स्तर 23 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 24 घंटे की 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की गाइडलाइन से काफी अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश आमतौर पर हवा में मौजूद प्रदूषक कणों को नीचे जमीन तक पहुंचाने में मदद करती है। इसे ‘वेट डिपोजिशन’ कहा जाता है। इसके अलावा मानसून के दौरान तेज हवाएं और वातावरण में बेहतर मिश्रण भी प्रदूषकों को फैलाने में मदद करते हैं। इसके बावजूद कोलकाता में PM2.5 का औसत स्तर WHO की निर्धारित सीमा से नीचे नहीं जा पाया। अगस्त में देश के बड़े महानगरों में PM2.5 के औसत स्तर के मामले में कोलकाता दूसरे स्थान पर रहा। इस सूची में दिल्ली सबसे ऊपर थी। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के आंकड़ों के अनुसार, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत आकलन किए गए 89 शहरों में से 75 शहरों में PM2.5 का स्तर WHO की 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सीमा से ऊपर रहा। आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा का चरखी दादरी अगस्त में 68 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के औसत PM2.5 स्तर के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। वहीं महाराष्ट्र का डोंबिवली 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के औसत के साथ सबसे साफ शहरों में रहा।

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