व्हाट्सऐप ग्रुप में टिप्पणी को नहीं माना जा सकता सांप्रदायिक नफरत फैलाना: हाईकोर्ट ने FIR रद्द की

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कोलकाता: व्हाट्सऐप के एक क्लोज्ड ग्रुप में की गयी कुछ टिप्पणियों को लेकर दर्ज एफआईआर को कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर इन टिप्पणियों को विभिन्न समुदायों के बीच घृणा या दुश्मनी फैलाने के लिए उकसाने वाला अपराध नहीं माना जा सकता। मामले में 28 जून 2024 को इको पार्क थाने में शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गयी थी। आरोप था कि एक आवासीय परिसर के व्हाट्सऐप ग्रुप में तत्कालीन मुख्यमंत्री के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गयीं और एक विशेष समुदाय के संबंध में भी टिप्पणी की गयी। शिकायत में सरकार की नीतियों और कोलकाता के अलग-अलग इलाकों में हॉकर हटाने की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाये जाने का भी उल्लेख था। मामले में एक चिकित्सक सहित आवासीय परिसर की पूर्व गवर्निंग बॉडी के पदाधिकारी और सदस्य आरोपी बनाये गये थे। आरोपियों ने एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया। न्यायमूर्ति चैताली चटर्जी (दास) ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि एफआईआर में विभिन्न समुदायों के बीच घृणा या दुश्मनी फैलाने के लिए उकसावे के प्रथम दृष्टया तत्व नहीं मिलते। धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से आहत करने का आधार भी नहीं पाया गया। अदालत ने यह भी कहा कि व्हाट्सऐप बातचीत को किसी आपराधिक साजिश से जोड़ने का प्रथम दृष्टया आधार सामने नहीं आया।

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