पश्चिम बंगाल में 100 की उम्र पार कर चुके मतदाता हैं 12,000

35% मतदाता मृत मगर अब भी है मतदाता सूची में नाम
पश्चिम बंगाल में 100 की उम्र पार कर चुके मतदाता हैं 12,000
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कोलकाता : चुनावी राज्य बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले भारत निर्वाचन आयोग ने पाया है कि 100 वर्ष से अधिक उम्र के करीब 35% मतदाता अब जीवित नहीं हैं, लेकिन उनके नाम अब भी मतदाता सूची में दर्ज हैं। सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग ने राज्य के 12,000 शतायु मतदाताओं की सूची बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय को सत्यापन के लिए भेजी थी। जांच में सामने आया कि इनमें से लगभग आधे लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके नाम जनवरी 2025 में प्रकाशित मतदाता सूची से हटाए नहीं गए। आयोग के एक अधिकारी ने कहा, ‘यह चिंता का विषय है क्योंकि मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम समय पर नहीं हटाए जाते। इससे अक्सर राजनीतिक दलों पर मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम से प्रॉक्सी वोटिंग कराने का आरोप लगता है। यही कारण है कि आयोग मतदाता सूची को हमेशा शुद्ध रखने की कोशिश करता है।’ राज्य चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि सभी राज्यों को भारत निर्वाचन आयोग की ओर से शतायु पार कर चुके मतदाताओं की सूची भेजी गयी थी।

जानकारी के मुताबिक, यह समस्या सबसे पहले जून 2025 में नदिया जिले की कालिगंज विधानसभा उपचुनाव के दौरान सामने आई थी, जब 2.52 लाख मतदाताओं में से 8,000 से अधिक मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए गए। इसके बाद आयोग ने पाया कि बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई थी। इसी कारण बीएलओ को प्रत्यक्ष सरकारी कर्मचारियों में से नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। अब शतायु मतदाताओं की जांच में भी मृतक नामों की भारी संख्या सामने आई है। एक अधिकारी ने कहा, ‘यह एक राष्ट्रीय अभ्यास का हिस्सा था। सभी राज्यों को शतायु मतदाताओं की सूची भेजकर सत्यापन को कहा गया था, लेकिन ऐसा लगता है कि मृत मतदाताओं की संख्या में बंगाल सबसे आगे है।’ बंगाल की मौजूदा मतदाता सूची में 7.62 करोड़ मतदाता हैं। आयोग ने 2002 और 2025 की मतदाता सूची को 26 सितंबर तक मैच कराने का निर्देश दिया है। इससे मृत मतदाताओं की प्राथमिक संख्या का अंदाजा लगाया जा सकेगा, हालांकि सटीक संख्या केवल एसआईआर के बाद ही सामने आएगी।

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