

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हावड़ा शहर की सड़कों पर सुबह की पहली रोशनी के साथ जिस नाम का खौफ फैलता था, वह था बाबुल अली। सिगरेट, गुटखा और बेवरेज लूट की दुनिया में उसे ‘बादशाह’ कहा जाता था। वर्षों तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकने वाला यह शातिर अपराधी आखिरकार अपने ही जाल में फंस गया। हावड़ा के पुलिस अधिकारी आईपीएस शुखेंदु हीरा के अनुसार, बाबुल अली ने सिगरेट लूट को संगठित अपराध का रूप दे दिया था। उसका तरीका बेहद सुनियोजित था। तड़के सुबह जब मालवाहक गाड़ियां शहर में दाखिल होती थीं, तभी वह अपने साथियों के साथ सक्रिय हो जाता था। सुनसान सड़कों पर ट्रक या पिकअप वैन को रोककर चालक को डराया जाता था और पूरा माल कुछ ही मिनटों में गायब कर दिया जाता था। जांच में सामने आया कि बाबुल केवल लूट तक सीमित नहीं था, बल्कि उसने अवैध सप्लाई का पूरा नेटवर्क खड़ा कर रखा था। लूटी गई सिगरेट और तंबाकू उत्पादों को वह शहर और आसपास के इलाकों में सस्ते दामों पर खपाता था। इसी नेटवर्क के दम पर वह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। कई थानों में उसके खिलाफ मामले दर्ज थे, लेकिन हर बार वह पहचान बदलकर या इलाक छोड़कर बच निकलता था। पुलिस सूत्रों का कहना था कि बाबुल बेहद चालाक था और अपराध करने से पहले रेकी पर खास ध्यान देता था। उसे पता रहता था कि किस रास्ते पर कब पुलिस की मौजूदगी कम रहेगी। आखिरकार गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने उसके ठिकाने पर छापा मारा। बाबुल ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के आगे उसकी एक न चली। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से लूट से जुड़े अहम सबूत भी बरामद किए गए, जिससे कई पुराने मामलों की कड़ियां जुड़ गईं। पूछताछ में बाबुल ने स्वीकार किया कि उसने सिगरेट और गुटखा लूट को इसलिए चुना क्योंकि इसमें जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा था। पुलिस को उम्मीद थी कि उससे पूछताछ में उसके बाकी साथियों और पूरे नेटवर्क का भी खुलासा होगा। पुलिस ने आरोपित को अदालत में पेश किया, जहां से उसे हिरासत में भेज दिया गया। अधिकारियों का मानना था कि बाबुल की गिरफ्तारी के बाद सिगरेट लूट के मामलों में बड़ी गिरावट आएगी और इस अवैध कारोबार की कमर टूटेगी।