हावड़ा स्टेशन का विकास सफर : एक प्लेटफॉर्म से विशाल परिसर तक

1865 में अलग आगमन-प्रस्थान की सुविधा के लिए एक और प्लेटफॉर्म जोड़ा गया 1895 तक प्लेटफॉर्म की संख्या बढ़कर 5 हो गई, अब हावड़ा स्टेशन पर वर्तमान में 23 प्लेटफॉर्म हैं
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : भारतीय रेल के इतिहास में हावड़ा स्टेशन का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। एक समय मात्र एक प्लेटफॉर्म से शुरू हुआ यह स्टेशन आज देश के सबसे व्यस्त और विशाल रेल परिसरों में शामिल है। यात्रियों की बढ़ती संख्या और ट्रेनों के विस्तार के साथ-साथ हावड़ा स्टेशन का निरंतर विकास होता रहा है, जो इसकी ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक जरूरतों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। शुरुआती दौर में यहां केवल दो ट्रेनें संचालित होती थीं। वर्ष 1865 में अलग आगमन-प्रस्थान की सुविधा के लिए एक और प्लेटफॉर्म जोड़ा गया। 1895 तक प्लेटफॉर्म की संख्या बढ़कर पांच हो गई। बीसवीं सदी के आरंभ में नए स्टेशन भवन के निर्माण के साथ छह नए प्लेटफॉर्म बने। समय के साथ उपनगरीय यातायात में वृद्धि, विद्युतीकरण और माल ढुलाई की जरूरतों ने प्लेटफॉर्म संख्या को लगातार बढ़ाया। 1957 के बाद उपनगरीय ट्रैफिक में तेजी आई, जिससे प्लेटफॉर्म 8 तक विस्तार हुआ। बाद में दक्षिणी विंग, पार्सल प्लेटफॉर्म, डॉक्स प्लेटफॉर्म और ईएमयू सेवाओं के लिए विशेष ढांचे विकसित किए गए। प्लेटफॉर्म संख्या 14 अपनी विशेष संरचना के लिए जाना जाता है, जहां प्लेटफॉर्म, ट्रैक और ओवरहेड तार पूरी तरह शेड से ढके हैं, जिससे यात्रियों को बारिश से पूर्ण सुरक्षा मिलती है। 1990 के दशक में ‘न्यू कॉम्प्लेक्स’ का निर्माण हुआ, जहां प्लेटफॉर्म 18 से 21 तक जोड़े गए। इसी के साथ रेल यात्री निवास जैसी सुविधाएं भी शुरू की गईं। 2005 में दो और प्लेटफॉर्म की आधारशिला रखी गई, जिससे स्टेशन का विस्तार और मजबूत हुआ और प्लेटफार्म की संख्या बढ़कर 23 हो गई। हावड़ा स्टेशन की एक अनोखी पहचान इसका कैब रोड है, जो यात्रियों को सीधे प्लेटफॉर्म तक वाहन पहुंचाने की सुविधा देता है। पुराने और नए कैब रोड ने यात्री सुविधा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। आज हावड़ा स्टेशन में 23 प्लेटफॉर्म हैं। जहां एक समय मात्र एक प्लेटफॉर्म से शुरू हुआ यह ऐतिहासिक स्टेशन अब भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक बार फिर बड़े विस्तार के दौर से गुजर रहा है। अब और नये प्लेटफार्मों का निर्माण कार्य तेज़ी से किया जा रहा है। इन नये प्लेटफार्मों का उद्देश्य टर्मिनल पर दबाव कम करना है। रेल सूत्रों के अनुसार, नये प्लेटफार्मों के साथ आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम, चौड़े शेड, उन्नत यात्री प्रतीक्षालय, लिफ्ट-एस्केलेटर, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और डिजिटल सूचना प्रणाली भी विकसित की जा रही है। साथ ही ट्रैक लेआउट और यार्ड रिमॉडलिंग के जरिए ट्रेन परिचालन को और अधिक सुचारु बनाया जाएगा। ईस्टर्न रेलवे और साउथ ईस्टर्न रेलवे की सेवाओं को अलग-अलग संचालन में मदद मिलेगी, जिससे प्लेटफार्म कंजेशन में उल्लेखनीय कमी आएगी। आज हावड़ा स्टेशन प्रतिदिन 500 से अधिक ट्रेनों का संचालन और 10 लाख से ज्यादा यात्रियों को संभालने वाला विशाल रेल केंद्र है। नये प्लेटफार्मों के निर्माण के बाद यह स्टेशन न केवल पूर्वी भारत, बल्कि पूरे देश के सबसे सक्षम और आधुनिक रेलवे टर्मिनलों में और मजबूत स्थान बनाएगा। आगे जारी रहेगा...


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