बचाओ-बचाओ की चीखों से दहला इलाका, जिंदा जले बुज़ुर्ग

पत्नी-बेटे की भूमिका पर सवाल
बचाओ-बचाओ की चीखों से दहला इलाका, जिंदा जले बुज़ुर्ग
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : रविवार दोपहर मध्य हावड़ा के मधुसूदन विश्वास लेन में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक बुज़ुर्ग व्यक्ति “बचाओ-बचाओ” चिल्लाते हुए जलती हालत में घर से बाहर निकल आए। उनका पूरा शरीर आग से झुलस चुका था। यह दिल दहला देने वाला दृश्य देख पड़ोसी सन्न रह गए। गंभीर हालत में उन्हें सियालदह के बी. आर. सिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की जांच शुरू कर दी गई है। घायल बुज़ुर्ग की पहचान निखिल रंजन बोस (61) के रूप में हुई है। वे रेलवे के सेवानिवृत्त टिकट परीक्षक हैं। निखिल बोस उसी घर में अपनी पत्नी सुमिता बोस और इकलौते बेटे अनिलाभ रंजन बोस के साथ रहते थे। बेटा पहले काम करता था, लेकिन फिलहाल बेरोज़गार बताया जा रहा है। पड़ोसियों के अनुसार, निखिल बोस का पत्नी और बेटे के साथ अक्सर झगड़ा होता था। रविवार सुबह भी घर के भीतर से तेज़ चीख-पुकार और मारपीट की आवाज़ें सुनी गई थीं। इसके कुछ ही घंटों बाद दोपहर करीब एक बजे यह भयावह घटना सामने आई। घटना के समय पत्नी घर में मौजूद थीं, जबकि बेटा बाहर था। बावजूद इसके, पति के जलने के बाद भी पत्नी ने पड़ोसियों को तुरंत सूचना क्यों नहीं दी। इसे लेकर रहस्य गहराता जा रहा है। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि निखिल बोस को किसी ने आग लगाई या उन्होंने खुद ऐसा किया। डीसी सेंट्रल तौसिफ अली अजहर ने बताया कि प्राथमिक जानकारी के अनुसार, उनके शरीर का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा झुलस गया है। पड़ोसियों की मदद से उन्हें पहले हावड़ा मैदान स्थित रेलवे ऑर्थोपेडिक अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर सियालदह के बी. आर. सिंह अस्पताल रेफर किया गया।

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