

नई दिल्ली : भारतीय रेलवे ने ट्रेनों, स्टेशनों और अपने सभी प्रतिष्ठानों में ठोस कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि अब मंडल, जोनल रेलवे और रेलवे बोर्ड स्तर पर समर्पित पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन (Environment & Housekeeping Management- EnHM) विभाग स्थापित किए गए हैं, जो कचरा प्रबंधन से जुड़े सभी कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगे।
रेलवे मंत्री ने बताया कि भारतीय रेलवे ने ट्रेनों और स्टेशनों से निकलने वाले कचरे के संग्रह, पृथक्करण, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक निस्तारण के लिए एक समग्र व्यवस्था विकसित की है। स्टेशनों पर स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण के लिए दोहरे डस्टबिन लगाए गए हैं, जबकि ट्रेनों से निकलने वाले कचरे को निर्धारित वेस्ट हैंडलिंग स्टेशनों पर नियमित रूप से एकत्र किया जाता है। इन स्टेशनों का शहरी स्थानीय निकायों और नगर निकायों के साथ समन्वय है, जिससे कचरे का उचित निपटान सुनिश्चित किया जा सके।
रेलवे ने पर्यावरण अनुकूल कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए देशभर के स्टेशनों पर 13 बायोगैस संयंत्र, 171 कंपोस्टिंग प्लांट और 8 मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) स्थापित की हैं। इनके अलावा 858 प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनें भी लगाई गई हैं। इन संयंत्रों की कुल क्षमता प्रतिदिन हजारों किलोग्राम कचरे के प्रसंस्करण की है।
रेलवे मंत्री ने बताया कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 के लागू होने और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद रेलवे ने ठोस कचरा प्रबंधन को और सुदृढ़ करने के लिए कई नई पहल शुरू की हैं। रेलवे बोर्ड ने सभी स्टेशनों, ट्रेनों, रेलवे कॉलोनियों, अस्पतालों, कार्यशालाओं, उत्पादन इकाइयों और अन्य प्रतिष्ठानों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SoP) जारी किया है। इसमें कचरे के पृथक्करण, संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण, वैज्ञानिक निस्तारण, निगरानी व्यवस्था और विभिन्न प्रशासनिक स्तरों की जिम्मेदारियों का विस्तृत उल्लेख किया गया है।
जोनल रेलवे को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 के तहत बड़े कचरा उत्पादक (Bulk Waste Generator) इकाइयों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पूरे भारतीय रेलवे में कचरे की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के लिए "एज़-इज़ वेस्ट कैरेक्टराइजेशन एंड क्वांटिफिकेशन स्टडी" भी प्रस्तावित की गई है।
प्रत्येक जोनल रेलवे में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो व्यापक कार्ययोजना तैयार करने, समय-समय पर ऑडिट कराने, योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करने और रेलवे बोर्ड को अनुपालन रिपोर्ट भेजने का कार्य करेंगे। मंडलों को भी प्रभावी कचरा प्रबंधन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
यात्रियों को स्वच्छ और बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रेलवे की ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस (OBHS) वर्तमान में 1,450 जोड़ी लंबी दूरी की ट्रेनों में उपलब्ध है, जिससे यात्रा के दौरान कोचों की लगातार सफाई सुनिश्चित की जाती है।
इसके अलावा क्लीन ट्रेन स्टेशन (CTS) योजना के तहत देश के 63 स्टेशनों पर 2,800 ट्रेनों को शामिल किया गया है। इस योजना के अंतर्गत निर्धारित ठहराव के दौरान विशेष सफाई दल कोचों के शौचालयों और वॉशबेसिन की सफाई करने के साथ-साथ डस्टबिन में जमा कचरे को भी एकत्र करते हैं, जिससे यात्रियों को स्वच्छ और बेहतर सुविधाएं मिल सकें।