SIR : हावड़ा में बीएलओ का फार्म बांटने का अनोखा ढंग

वोटर लिस्ट में पता है लेकिन घर ही नहीं फिर भी बंट रहे हैं फार्म मध्य हावड़ा के एक पूर्व पार्षद ने की सीईओ से शिकायत
The names of 13 BLOs associated with the important work of SIR are not in the voter list of 2002!
सांकेतिक फोटो REP
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : राज्य भर में SIR को लागू कर दिया गया है और गत मंगलवार से बीएलओ घर-घर जाकर फार्म बांट रहे हैं ताकि लोग अपना डिटेल्स भर सकें। इस बीच हावड़ा मध्य में फिर एक बार विचित्र घटना देखने को मिली। यहां वोटर लिस्ट में जो पता दर्ज है उस पता पर तो कोई मकान ही नहीं है। ऐसा कई लोगों के वोटर आईडी में देखा जा रहा है। ऐसे में आरोप है कि जो लोग दूसरी जगह रहने लगे हैं, बीएलओ उन्हें फोनकर उनके पुराने पता पर बुलाकर ही उन्हें फार्म दे दे रहे हैं। ऐसा करना निर्वाचन आयोग के निर्देशों का सरासर उल्लंघन है। इलाके के पूर्व पार्षद शैलेश राय का कहना है कि यह नियम सही नहीं है बल्कि लोगों के पता को ठीक करके उन्हें उनके सही पता पर ही फार्म देना जायज है। बीएलओ द्वारा अनोखे ढंग से बांटे जा रहे फॉर्म की घटना को लेकर पूर्व पार्षद ने सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल से शिकायत की है। मध्य हावड़ा के 171 नं. विधानसभा क्षेत्र के 105 नंबर पार्ट की वोटर लिस्ट में जहां सैकड़ों लोगों का पता 7 नंबर ऋषि बंकीम चंद्र रोड दर्ज है वहां पर डीएम व एसडीओ कार्यालय है। वोटर आईडी के मुताबिक यहां सैकड़ों लोग रहते हैं, लेकिन वास्तव में वहां कोई नहीं रहता है। ऐसे में बीएलओ किस प्रकार से वहां फार्म वितरित कर रहे हैं। इसकी जांच की जाये। हालांकि सीईओ ने आश्वासन दिया है कि यह कैसे हुआ, वे इसकी जांच करेंगे? दरअसल कुछ समय पहले भी राज्य सरकार की ओर से निगम द्वारा भी सर्वे किया गया था। इसमें यही वाकया उठा था कि साल 2014 में वहीं वोटर आईडी कार्ड को दिखाकर आधार कार्ड बन गया। इससे वोटर्स का नाम उसी पता पर अपडेट किया जाने लगा। ऐसे में आज वोटर्स कहीं और रह रहे हैं और उनका पता कहीं और का है। इसके तहत सर्वे किया गया था। साथ में सन्मार्ग की टीम को भी पता चला कि यहां वोटर लिस्ट में मौजूद नाम के कई लोग यहां रहते ही नहीं हैं बल्कि यहां पर सरकारी कार्यालय है। इसके बाद 5 नं. नित्याधन मुखर्जी रोड पहुंचने पर एक ही किस्सा नजर आया कि वहां पर एक पर्सनल बिल्डिंग है। वहां के रहनेवाले करीब 20 लोगों के नाम उक्त सूची में थे। इस विषय में पूर्व पार्षद ने इलेक्शन कमिश्नर को इसकी जानकारी दी थी लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई और अब एसआईआर के तहत भी फार्म वितरित किये जा रहे हैं। इस बार सीईओ की ओर से मामले की जांच का आश्वासन मिला है। ऐसे में पूर्व पार्षद को उम्मीद है कि कोई न कोई कार्रवाई की जायेगी।


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