हावड़ा के बेलगाछिया डंपिंग ग्राउंड से कचरे में छिपे ईंधन की तलाश

ओडिशा के सीमेंट कारखाने को भेजा जाएगा आरडीएफ
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गंगा तट बने डंपिंग ग्राउंड
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : वर्षों से डंपिंग ग्राउंड में जमा कचरे के पहाड़ अब आय और वैकल्पिक ऊर्जा का स्रोत बन सकते हैं। राज्य सरकार ने कचरे से तैयार होने वाले विशेष ईंधन ‘आरडीएफ’ (रिफ्यूज़ डिराइव्ड फ्यूल) को संग्रहित कर बेचने की पहल शुरू की है। इस योजना के तहत कोलकाता महानगर विकास प्राधिकरण (KMDA) हावड़ा के बेलगाछिया डंपिंग साइट से आरडीएफ एकत्र कर ओडिशा के राजगंगपुर स्थित एक निजी सीमेंट कारखाने को भेजेगा। राज्य के नगर एवं शहरी विकास विभाग के अधिकारियों का दावा है कि राज्य में पहली बार किसी डंपिंग साइट से आरडीएफ संग्रह की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।

क्या है आरडीएफ? : केएमडीए के इंजीनियरों के अनुसार, आरडीएफ कचरे से तैयार एक विशेष प्रकार का ईंधन है, जिसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह मुख्यतः नगर निगम के ठोस अपशिष्ट, औद्योगिक और व्यावसायिक कचरे से बनाया जाता है। पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक (पीवीसी को छोड़कर), कागज, कार्डबोर्ड और लकड़ी जैसे ज्वलनशील पदार्थों को अलग कर सुखाया जाता है और फिर पेलेट के रूप में तैयार किया जाता है। इस ईंधन का उपयोग सीमेंट कारखानों, कोयला आधारित बिजली उत्पादन केंद्रों और इस्पात भट्टियों में सेकेंडरी फ्यूल के रूप में किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, इसका बाजार मूल्य लगभग 4,000 रुपये प्रति टन है।

क्या कहना है अधिकारियों का : केएमडीए अधिकारियों का कहना है कि यदि इस परियोजना को सही तरीके से लागू किया गया तो इससे आय का नया स्रोत खुलेगा और नगरपालिकाओं की आमदनी भी बढ़ेगी। साथ ही, शहर में कचरा प्रबंधन की समस्या से भी काफी हद तक राहत मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि बेलगाछिया डंपिंग ग्राउंड में करीब 120 वर्षों से कचरा जमा है। पिछले वर्ष यहां धंसाव की घटना के बाद से नए कचरे का डंपिंग बंद कर दिया गया है, इसी कारण इस स्थल को आरडीएफ संग्रह के लिए चुना गया है। हालांकि पर्यावरण कार्यकर्ता सुभाष दत्त ने आशंका जताई है। उनका कहना है कि इससे पहले कोलकाता नगर निगम ने भी ऐसी पहल की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई। इस बार परियोजना कितनी कारगर होगी, इस पर संदेह बना हुआ है।

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