हावड़ा से आज निकलेगी ‘रॉल्स रॉयस होली’

1884 से चली आ रही राजसी परंपरा
हावड़ा से आज निकलेगी ‘रॉल्स रॉयस होली’
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : हावड़ा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बन चुकी ‘रॉल्स रॉयस होली’ इस वर्ष भी रविवार को पूरे शाही अंदाज में हावड़ा से निकलेगी। फूलों और रंगों से सजी विंटेज रॉल्स-रॉयस कार जब राजसी रथ का रूप लेकर सड़कों पर उतरेगी, तो श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। इस वर्ष गत 26 फरवरी को शोभायात्रा में सत्यनारायण भगवान व मां लक्ष्मी विंटेज कार से कोलकाता के सत्यनारायण मंदिर से निकले। यह शोभायात्रा तुलापट्टी, रवींद्र सरणी, चितपुर, राजाकटरा और हावड़ा ब्रिज होते हुए मुखराम कानोड़िया रोड स्थित श्री श्री सत्यनारायण मंदिर पहुंची थी। इसके बाद वापसी आज यानी रविवार को शोभायात्रा निकलेगी, जो हावड़ा ब्रिज से होते हुए राजाकटरा, सोनापट्टी, लोहापट्टी, बांसतल्ला, आड़ीबांसतल्ला, बड़तल्ला और कलाकार स्ट्रीट मार्ग से पुनः सत्यनारायण मंदिर पहुंचेगी। श्री श्री ईश्वर सत्यनारायण जी एंड अनदर डिवोटिज ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी मधुसूदन बागला ने सन्मार्ग को बताया कि ‘रॉल्स रॉयस होली’ श्रद्धा, इतिहास और शाही विरासत का अनूठा संगम है। आज जब हावड़ा से यह ऐतिहासिक शोभायात्रा निकलेगी, तो पूरा शहर रंग, भक्ति और राजसी ठाठ से सराबोर हो उठेगा। ‘रॉल्स रॉयस होली’ केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हावड़ा की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। वहीं गत 26 फरवरी को निकली भगवान की सवारी में बागला परिवार जो मुख्य रूप से था। उसमें महावीर प्रसाद सांवरिया व जय भगवान सांवरिया समेत अन्य सक्रिय थे। मधुसूदन बागला ने बताया कि इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1884 में राय बहादुर शिवबक्स बागला ने की थी। उन्हें ब्रिटेन की महारानी Queen Victoria द्वारा ‘राजा’ की उपाधि प्रदान की गई थी। बताया जाता है कि बर्मा से कोलकाता आते समय उन्हें अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन भगवान सत्यनारायण की कृपा से सभी संकट दूर हुए। आस्था और कृतज्ञता स्वरूप उन्होंने भगवान की सवारी निकालने की परंपरा शुरू की। समय के साथ भगवान की सवारी का स्वरूप बदलता गया—पहले हाथों में, फिर पालकी में और अब विंटेज रॉल्स-रॉयस कार में भगवान की सवारी निकाली जाती है। यह दुर्लभ कार कभी नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक Rudyard Kipling की थी। बाद में बागला परिवार ने यह कार खरीदी और इसे रथ का स्वरूप देकर भगवान की सवारी के लिए समर्पित कर दिया।

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