

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा : हावड़ा के पिलखाना इलाके में प्रमोटर सौफिक खान की हत्या के बाद मामला काफी हाई-प्रोफाइल हो गया था। बताया जा रहा था कि इस मामले के अभियुक्तों का बैकग्राउंड राजनीति से जुड़ा हुआ है, जिसके कारण हावड़ा पुलिस के लिए यह केस काफी चुनौतीपूर्ण बन गया था। इसके बाद हावड़ा की गोलाबाड़ी थाना के प्रभारी शांतनु बसु की पुलिस व डीडी के प्रभारी आशुतोष राय ने सीपी आकाश मघारिया नेतृत्व में मुख्य अभियुक्त को दिल्ली के जामा मज्जिद इलाके से गिरफ्तार किया। इस बारे में हावड़ा उत्तर के एसीपी शेख हबीबुल्लाह ने बताया कि गत 25 फरवरी को हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद अभियुक्त हारून और रोहित फरार हो गए थे। जांच के दौरान पुलिस को उनका अंतिम लोकेशन जोड़ासांको इलाके में मिला था। इसके बाद पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी रही। एसीपी ने बताया कि अभियुक्तों ने फरारी के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया, जिससे पुलिस के लिए उनकी लोकेशन ट्रैक करना और भी मुश्किल हो गया था। इसके बावजूद पुलिस ने अपने मैनुअल सोर्स को सक्रिय किया और दिल्ली व आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से जांच को आगे बढ़ाया। जांच में पता चला कि 27 फरवरी को अभियुक्तों ने कोलकाता से बिहार शरीफ जाने के लिए कार बुक की थी। उसी कार के जरिए वे पहले बिहार पहुंचे। बताया जा रहा है कि रोहित मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और बिहार शरीफ में उसकी पहले से जान-पहचान थी। इसके बाद दोनों बिहार शरीफ से कार से ही बख्तियारपुर स्टेशन पहुंचे। उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे, इसलिए वहां से वे किसी ट्रेन के जनरल कंपार्टमेंट में बैठकर दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके पहुंच गए। एसीपी के अनुसार हारून की एक बहन दिल्ली में रहती है, लेकिन अभियुक्तों ने उससे भी किसी तरह की मदद नहीं ली। दिल्ली पहुंचने के बाद दोनों एक कॉटेज में रह रहे थे। इस दौरान हावड़ा पुलिस लगातार दिल्ली पुलिस के संपर्क में रही। अभियुक्तों तक पहुंचने के लिए पुलिस को कई बार ट्रेनों से यात्रा करनी पड़ी और कई टिकट भी कटवाने पड़े। एसीपी ने बताया कि अभियुक्तों की तलाश में आरपीएफ, सीआईएसएफ और दिल्ली पुलिस ने भी हावड़ा पुलिस की काफी मदद की। ट्रेन में यात्रा के दौरान आरपीएफ, मेट्रो में सीआईएसएफ और दिल्ली में स्थानीय स्तर पर दिल्ली पुलिस के सहयोग से आखिरकार दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया।