मिजोरम में रेल कनेक्टिविटी का एक साल पूरा, 15 लाख से अधिक यात्रियों ने किया सफर

मिजोरम में रेलवे पुल हादसा
मिजोरम में रेलवे पुल हादसा
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नई दिल्ली : मिजोरम में बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन के उद्घाटन के एक वर्ष पूरे हो गए हैं। 13 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेल लाइन और सैरांग रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया था। एक वर्ष के भीतर यह रेल परियोजना मिजोरम में यात्री आवागमन, पर्यटन और माल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है।

15 लाख से अधिक यात्रियों ने किया सफर

रेलवे के अनुसार, पिछले एक वर्ष में सैरांग से गुवाहाटी, कोलकाता और दिल्ली के लिए लंबी दूरी की ट्रेन सेवाएं शुरू हुई हैं। सैरांग-सिलचर पैसेंजर सेवा भी जनवरी 2026 में शुरू की गई। इन सेवाओं ने एक वर्ष में 1100 से अधिक यात्राएं पूरी की हैं और 15 लाख से अधिक यात्रियों ने इनका लाभ उठाया है। सभी ट्रेनें प्रत्येक यात्रा में 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता के साथ चल रही हैं। सैरांग-कोलकाता ट्रेन में औसत ऑक्यूपेंसी 140 प्रतिशत से अधिक, सैरांग-गुवाहाटी सेवा में 110 प्रतिशत से अधिक और सैरांग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस में करीब 145 प्रतिशत रही। इन सेवाओं से रेलवे को 54 करोड़ रुपये की टिकट आय हुई है।

153 पुल और 45 सुरंगों से होकर गुजरती है लाइन

बैराबी-सैरांग रेल लाइन मिजोरम के दुर्गम पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरती है। परियोजना में 153 पुल शामिल हैं, जिनमें 55 बड़े और 88 छोटे पुल हैं। छह पुलों की ऊंचाई 70 मीटर से अधिक है, जबकि सबसे ऊंचा पुल 114 मीटर का है। इसके अलावा रेल लाइन में करीब 16 किलोमीटर लंबी 45 सुरंगें हैं। यह लाइन बैराबी से आगे हॉर्टोकी, कावनपुई और मुआलखांग होते हुए सैरांग तक पहुंचती है और मिजोरम की राजधानी आइजोल के करीब तक रेल संपर्क उपलब्ध कराती है।

एक साल में 2500 से अधिक माल वैगन पहुंचे सैरांग

रेल कनेक्टिविटी से मिजोरम में माल परिवहन को भी बढ़ावा मिला है। 14 सितंबर 2025 को उद्घाटन के अगले ही दिन सैरांग पहुंची पहली मालगाड़ी में 26 हजार से अधिक बोरी सीमेंट भेजी गई थी। इसके बाद दिसंबर 2025 में गुवाहाटी के पास चांगसारी से 119 मारुति कारों की पहली खेप रेल मार्ग से सैरांग पहुंची।

पिछले एक वर्ष में सैरांग में 2500 से अधिक माल वैगन पहुंच चुके हैं। इनमें करीब 70 प्रतिशत निर्माण सामग्री—सीमेंट, पत्थर और रेत—शामिल थी। इसके अलावा चावल, उर्वरक और ऑटोमोबाइल की खेप भी रेल के जरिए पहुंची। इससे सड़क मार्ग से लंबी दूरी तक भारी सामान ढोने पर निर्भरता कम हुई है।

पर्यटन में 86 प्रतिशत से अधिक वृद्धि

रेलवे के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी और सिलचर से सीधी ट्रेन सेवाओं के कारण मिजोरम पहुंचना आसान और किफायती हुआ है। रेल कनेक्टिविटी शुरू होने के बाद राज्य में पर्यटन में 86 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इससे होटल, होमस्टे, रेस्तरां, टैक्सी, गाइड और स्थानीय बाजारों को भी लाभ मिल रहा है। छात्रों के लिए देश के दूसरे हिस्सों में विश्वविद्यालयों, संस्थानों, परीक्षाओं और शैक्षणिक कार्यक्रमों तक पहुंच भी आसान हुई है।

स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच

रेलवे के माध्यम से मिजोरम के हथकरघा, बांस, बेंत और हस्तशिल्प उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने का रास्ता भी खुला है। 19 सितंबर 2025 को सैरांग से पहली पार्सल खेप दिल्ली भेजी गई थी। इसमें सैरांग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस की पार्सल वैन के जरिए एंथुरियम फूल भेजे गए थे।

रेलवे के मुताबिक, एक वर्ष में बैराबी-सैरांग लाइन ने मिजोरम में दूरी कम करने के साथ यात्रियों, छात्रों, पर्यटकों, व्यापारियों और स्थानीय उत्पादकों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। यह रेल संपर्क राज्य की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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