

नेताजी भवन और महानायक उत्तम कुमार मेट्रो स्टेशन के नाम भी सूची में शामिल
दुर्गापूजा के बाद होगी पहली बैठक
मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य सरकार की ओर से सड़कों, पुलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों के नाम बदलने के प्रस्तावों पर विचार के लिए गठित कमेटी अब मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने के प्रस्तावों पर भी विचार करेगी। कमेटी के सदस्य और भाजपा के वरिष्ठ नेता तथागत राय ने कहा कि यात्रियों की सुविधा और स्टेशनों की लोकेशन को लेकर होने वाले भ्रम को दूर करने के लिए मशहूर हस्तियों के नाम पर रखे गये कुछ मेट्रो स्टेशनों के नाम उनके स्थान के आधार पर रखे जाने चाहिए। तथागत राय ने नेताजी भवन और महानायक उत्तम कुमार मेट्रो स्टेशन के पुराने नाम क्रमशः भवानीपुर और टॉलीगंज बहाल करने का प्रस्ताव रखने की बात कही है। 10 सदस्यीय नामकरण कमेटी की पहली बैठक दुर्गापूजा के बाद होने की संभावना है। पहले चरण में कमेटी कोलकाता की सड़कों के नाम बदलने के प्रस्तावों पर विचार करेगी। इनमें लेनिन सरणी, कार्ल मार्क्स सरणी और हो-ची-मिन्ह सरणी के नाम बदलने के प्रस्ताव भी शामिल हैं।
ऑरेंज लाइन के स्टेशनों के नाम भी बदलने का प्रस्ताव
जिन अन्य स्टेशनों के नाम बदलने का प्रस्ताव रखा जाएगा, उनमें ऑरेंज लाइन के हेमंत मुखोपाध्याय (रूबी क्रॉसिंग), ज्योतिरिंद्र नंदी (मुकुंदपुर क्रॉसिंग) और स्वप्नो भोर (न्यू टाउन) शामिल हैं। पूरा होने के बाद ऑरेंज लाइन न्यू गरिया को एयरपोर्ट से जोड़ेगी। राय के मुताबिक, इनमें से अधिकांश स्टेशनों के नाम उस समय रखे गये थे, जब ममता बनर्जी यूपीए सरकार में रेल मंत्री थीं। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी और बिना उचित योजना के रखे गये नामों के कारण यात्रियों को स्टेशन की वास्तविक लोकेशन समझने में परेशानी होती है।
नेताजी भवन को लेकर भी दिया तर्क
तथागत राय ने कहा कि नेताजी भवन स्टेशन नेताजी सुभाष चंद्र बोस के एल्गिन रोड स्थित पैतृक घर से काफी दूरी पर है। ऐसे में यात्रियों के लिए स्टेशन का पुराना नाम भवानीपुर अधिक सुविधाजनक और स्पष्ट होगा। इसी तरह उन्होंने ईएम बाईपास स्थित बेलेघाटा मेट्रो स्टेशन का उदाहरण देते हुए कहा कि यह स्टेशन वास्तव में मेट्रोपॉलिटन इलाके में है और मुख्य बेलेघाटा क्षेत्र से काफी दूर है।
राजनीतिक कारणों से नहीं बदले जाएंगे नाम : कार्तिक महाराज
नाम बदलने वाली कमेटी के अध्यक्ष स्वामी प्रदीप्तानंद (कार्तिक महाराज) ने कहा कि मेट्रो स्टेशनों के नाम राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि यात्रियों को मौजूदा नामों से होने वाली परेशानी को दूर करने के उद्देश्य से बदले जाएंगे। मेट्रो अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि यदि राज्य सरकार की ओर से स्टेशनों के नाम बदलने का प्रस्ताव आता है, तो उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी।