

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: बंगाल में लंबित सड़क, पुल और रेलवे ओवरब्रिज परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से गठित टास्कफोर्स की पहली बैठक आयोजित हुई। बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और रेलवे के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। परियोजनाओं में देरी के प्रमुख कारणों के रूप में भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण, विभागीय समन्वय की कमी और प्रशासनिक जटिलताओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि इन बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर कर निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि लंबित मामलों का शीघ्र समाधान कर परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कराया जाए। राज्य में फिलहाल 21 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं तथा रेलवे की 127 ओवरब्रिज और अंडरपास परियोजनाएं विभिन्न कारणों से लंबित हैं। 3,910 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों में से 2,265 किलोमीटर का रखरखाव एनएचएआई, 1,324 किलोमीटर का पीडब्ल्यूडी और 321 किलोमीटर का जिम्मा राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम के पास है। राज्य की महत्वाकांक्षी खड़गपुर–मोरग्राम इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना में आंशिक भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो सका है। कई स्थानों पर मुआवजे का भुगतान लंबित है, जबकि कहीं बिजली लाइनों के स्थानांतरण और विभिन्न विभागों की मंजूरी का इंतजार है। बीरभूम और मुर्शिदाबाद में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया धीमी है, वहीं पूर्व बर्दवान में स्थानीय विरोध के कारण सर्वेक्षण प्रभावित हो रहा है। हावड़ा के 6 लेन एलिवेटेड कोना एक्सप्रेसवे का लगभग 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन चार मकानों को हटाने, ट्रैफिक डायवर्जन की अनुमति और सीईएससी की बिजली केबलों के स्थानांतरण में देरी के कारण शेष कार्य रुका हुआ है। बैठक में संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाकर इन समस्याओं का शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में भी भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और वन विभाग की स्वीकृति जैसी बाधाओं को जल्द दूर करने पर जोर दिया गया, ताकि विकास कार्यों में और देरी न हो।