कोलकाता मेट्रो को मिलेगी नई रफ्तार: अगले 5 वर्षों में शामिल होंगी 60 नई पीढ़ी की ट्रेनें

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बड़ा ऐलान, देश की सबसे पुरानी मेट्रो प्रणाली का होगा आधुनिकीकरण प्रस्तावित नई रेकों में कई उन्नत सुरक्षा और तकनीकी सुविधाएं होंगी
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : देश की पहली और सबसे पुरानी मेट्रो सेवा को आने वाले वर्षों में बड़ा तकनीकी विकास मिलने जा रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने गत शनिवार को घोषणा की कि अगले चार से पांच वर्षों के भीतर कोलकाता मेट्रो के बेड़े में 60 नई पीढ़ी (नेक्स्ट-जनरेशन) की अत्याधुनिक रेक शामिल की जाएंगी। इसका उद्देश्य बढ़ते नेटवर्क की जरूरतों को पूरा करना और यात्रियों को अधिक सुरक्षित तथा आधुनिक यात्रा अनुभव प्रदान करना है।

60 नई रेक से दूर होगी ट्रेनों की कमी

रेल मंत्री ने एयरपोर्ट से नोआपाड़ा तक मेट्रो यात्रा करने और बाद में चिंगड़ीघाटा में ऑरेंज लाइन के निर्माण कार्य का निरीक्षण करने के दौरान कहा कि कोलकाता मेट्रो नेटवर्क के तेजी से विस्तार को देखते हुए नई ट्रेनों की आवश्यकता है। वर्तमान में लगभग 72 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क आने वाले वर्षों में बढ़कर करीब 130 किलोमीटर तक पहुंचने की संभावना है। मेट्रो रेलवे इस समय रेक की कमी से जूझ रही है। ब्लू, पर्पल और ऑरेंज लाइनों के बीच उपलब्ध आठ-कोच वाली ट्रेनों को साझा करना पड़ रहा है। ऐसे में 60 नई रेकों का आगमन परिचालन क्षमता को काफी बढ़ाएगा।

क्या होंगी नई पीढ़ी की ट्रेनों की खासियतें?

प्रस्तावित नई रेकों में कई उन्नत सुरक्षा और तकनीकी सुविधाएं होंगी, जिनमें शामिल हैं—

एंटी-ड्रैग डोर सिस्टम, जिससे कपड़ा या कोई वस्तु दरवाजे में फंसने पर ट्रेन स्वतः रुक सकेगी। यात्रियों के लिए आपातकालीन ब्रेक सुविधा, जिससे संकट की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। आग या अन्य आपात स्थितियों में यात्रियों के ट्रेन से उतरते ही थर्ड रेल की बिजली स्वतः बंद हो जाएगी।

आधुनिक कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (CBTC) सिग्नलिंग के अनुरूप संचालन।

90 से 150 सेकंड के कम अंतराल पर ट्रेन चलाने की क्षमता।

पुराना टेंडर रद्द, अब नए सिरे से होगी खरीद?

गौरतलब है कि अगस्त 2025 में 10 अत्याधुनिक आठ-कोच रेकों की खरीद के लिए लगभग 900 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। हालांकि सितंबर 2025 में यह टेंडर रद्द कर दिया गया। अब रेल मंत्रालय की नई घोषणा के बाद उम्मीद है कि खरीद प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी, जिससे आगामी मेट्रो कॉरिडोरों के लिए आधुनिक ट्रेनों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

मुख्य बातें एक नजर में

* अगले 4-5 वर्षों में कोलकाता मेट्रो को मिलेंगी 60 नेक्स्ट-जनरेशन रेक।

* आधुनिक सुरक्षा और CBTC तकनीक से लैस होंगी नई ट्रेनें।

* बढ़ते 130 किमी मेट्रो नेटवर्क की जरूरतों को पूरा करने में मिलेगी मदद।

* ब्लू, पर्पल और ऑरेंज लाइनों पर रेक की कमी दूर होने की उम्मीद।

* कम अंतराल पर अधिक ट्रेनें चलाने का रास्ता होगा साफ।

कोलकाता मेट्रो के इतिहास में यह सबसे बड़े विस्तार कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है, जो शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।

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