सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : मेट्रो रेलवे ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए येलो लाइन के जेसोर रोड मेट्रो स्टेशन पर 500 kWp क्षमता वाले रूफटॉप सोलर पावर प्लांट का संचालन शुरू कर दिया है। इस सोलर प्लांट का उद्घाटन 15 जुलाई को मेट्रो रेलवे के महाप्रबंधक प्रेम सागर गुप्ता ने वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों की उपस्थिति में किया। मेट्रो रेलवे के अनुसार यह संयंत्र प्रतिदिन लगभग 1,800 यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा। इससे स्टेशन की सहायक बिजली जरूरतें, जैसे लाइटिंग, लिफ्ट और एस्केलेटर संचालित किए जाएंगे। आवश्यकता से अधिक उत्पन्न होने वाली बिजली मेट्रो के बिजली नेटवर्क में भेजी जाएगी।
हर साल करीब 50 लाख रुपये की होगी बचत
मेट्रो प्रशासन का अनुमान है कि इस परियोजना से हर वर्ष लगभग 50 लाख रुपये की बिजली लागत की बचत होगी। परियोजना पर आई लागत लगभग तीन वर्षों में ही वसूल हो जाएगी। सोलर प्लांट की अनुमानित संचालन अवधि 25 वर्ष है। इस संयंत्र की निगरानी के लिए क्लाउड-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे ऊर्जा उत्पादन और प्रदर्शन पर वास्तविक समय (रियल टाइम) में नजर रखी जा सकेगी।
34.3 MWp सौर क्षमता का लक्ष्य
जेसोर रोड स्टेशन का यह सोलर प्लांट मेट्रो रेलवे की व्यापक नवीकरणीय ऊर्जा योजना का हिस्सा है। इसके तहत नोआपाड़ा कारशेड के साथ-साथ ऑरेंज लाइन और पर्पल लाइन के स्टेशनों एवं डिपो में 13 MWp क्षमता की सौर परियोजनाओं के लिए जल्द ही ठेके दिए जाएंगे। इसके अलावा वर्ष 2027 तक 10 MWp अतिरिक्त सौर क्षमता स्थापित करने की भी योजना है। इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कोलकाता मेट्रो की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 34.3 MWp तक पहुंच जाएगी। इससे प्रतिदिन लगभग 1.2 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। मेट्रो रेलवे का अनुमान है कि इससे रोजाना लगभग 10 लाख रुपये की बिजली लागत की बचत होगी और 36 मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में प्रतिदिन कमी आएगी।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल
मेट्रो रेलवे का कहना है कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार से न केवल परिचालन लागत कम होगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।