कोलकाता मेट्रो ब्लू लाइन में हाईटेक वेंटिलेशन सिस्टम, पानी की होगी बड़ी बचत

आधुनिकीकरण पर 1,201 करोड़ रुपये खर्च होंगे टनेल वेंटिलेशन और एसी सिस्टम अपग्रेड पर 585 करोड़ रुपये 4 साल में पूरा होगा काम
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : कोलकाता मेट्रो की उत्तर-दक्षिण (ब्लू लाइन) शाखा के भूमिगत स्टेशनों में टनेल वेंटिलेशन और पर्यावरण नियंत्रण प्रणाली (सीईएस) के आधुनिकीकरण के लिए कुल 1,201 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। संसद में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी दी। बीजेपी सांसद जगन्नाथ सरकार के प्रश्न के जवाब में रेल मंत्री ने बताया कि ब्लू लाइन के भूमिगत स्टेशनों पर यात्री सुविधा, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से व्यापक आधुनिकीकरण कार्य चल रहा है। इस परियोजना में अत्याधुनिक टनेल वेंटिलेशन सिस्टम और एयर कंडीशनिंग व्यवस्था को अपग्रेड किया जाएगा।

585 करोड़ रुपये वेंटिलेशन और एसी सिस्टम पर : रेल मंत्री के अनुसार, कुल 1,201 करोड़ रुपये की परियोजना लागत में से 585 करोड़ रुपये आधुनिक टनेल वेंटिलेशन सिस्टम और पर्यावरण नियंत्रण (एयर कंडीशनिंग) प्रणाली पर खर्च किए जाएंगे। शेष राशि विद्युत आपूर्ति प्रणाली तथा अन्य सहायक कार्यों पर व्यय होगी।

पानी की बड़ी बचत होगी : अभी तक भूमिगत स्टेशनों में ‘वॉटर-कूल्ड चिलर’ प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जिसके संचालन के लिए भारी मात्रा में भूजल की आवश्यकता पड़ती है। आधुनिकीकरण के तहत इनकी जगह ‘एयर-कूल्ड चिलर’ लगाए जाएंगे। इससे प्रतिवर्ष लगभग 18 करोड़ लीटर पानी की बचत होने का अनुमान है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम पर्यावरण संरक्षण और भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा।

धुआं नियंत्रण की आधुनिक व्यवस्था : नई टनेल वेंटिलेशन प्रणाली में उन्नत धुआं नियंत्रण (स्मोक मैनेजमेंट) तंत्र शामिल होगा, जिससे किसी आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। मेट्रो प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों को सुरक्षित और अधिक आरामदायक सेवा प्रदान करना उनकी प्राथमिकता है।

चार साल में पूरा होगा कार्य : रेल मंत्री ने बताया कि इस व्यापक आधुनिकीकरण परियोजना को पूरा होने में लगभग चार वर्ष का समय लगेगा।

15 भूमिगत स्टेशन होंगे लाभान्वित : ब्लू लाइन पर टालिगंज (महानायक उत्तम कुमार) से बेलगाछिया तक मेट्रो लंबी दूरी तक भूमिगत सुरंग से गुजरती है और दमदम से पहले फिर से जमीन के ऊपर आती है। इस मार्ग में कुल 15 भूमिगत स्टेशन हैं, जहां यह आधुनिकीकरण कार्य किया जाएगा।

मेट्रो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब 4 दशक पहले भूमिगत सेवा शुरू हुई थी, तब नॉन-एसी ट्रेनों और कम यात्री संख्या को ध्यान में रखकर वेंटिलेशन और पर्यावरण नियंत्रण प्रणाली बनाई गई थी। वर्तमान जरूरतों और बढ़ती यात्री संख्या को देखते हुए अब इसे आधुनिक तकनीक से सुसज्जित किया जा रहा है।


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