

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पूर्वी भारत के प्रमुख रेल केंद्रों में शामिल कोलकाता शहर में लंबे समय तक दो बड़े टर्मिनल — हावड़ा स्टेशन और सियालदह स्टेशन — ही यात्री ट्रैफिक का मुख्य भार संभालते रहे लेकिन बढ़ती आबादी, लंबी दूरी की ट्रेनों की संख्या में वृद्धि और यात्रियों की लगातार बढ़ती भीड़ ने एक नए टर्मिनल की आवश्यकता को जन्म दिया। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए उत्तर कोलकाता के चितपुर इलाके में वर्ष 2006 में कोलकाता रेलवे स्टेशन (चितपुर) का उद्घाटन किया गया।
कोयला यार्ड से आधुनिक स्टेशन तक : आज जिस जगह पर कोलकाता रेलवे स्टेशन स्थित है, वह कभी 19वीं सदी का विशाल चितपुर रेल यार्ड था। इस यार्ड का उपयोग मुख्य रूप से कोयला लोडिंग और मालगाड़ियों के संचालन के लिए किया जाता था। समय के साथ रेल यातायात का स्वरूप बदला और इस क्षेत्र को आधुनिक यात्री टर्मिनल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई।
सियालदह पर बढ़ते दबाव ने दी नयी दिशा : साल 2000 के आसपास Eastern Railway ने महसूस किया कि सियालदह स्टेशन पर यात्रियों और ट्रेनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जबकि स्टेशन के विस्तार की संभावनाएं सीमित हैं। इसी कारण एक नए टर्मिनल के निर्माण की योजना बनाई गई, जो खास तौर पर लंबी दूरी की ट्रेनों को संचालित कर सके।
2006 में शुरू हुआ संचालन : वर्ष 2006 में कोलकाता (चितपुर) स्टेशन से ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। यह स्टेशन मुख्य रूप से लंबी दूरी की और गैर-उपनगरीय ट्रेनों के लिए विकसित किया गया है। पूर्वोत्तर भारत और देश के अन्य दूरस्थ क्षेत्रों की ओर जाने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनें अब यहीं से संचालित होती हैं।
विरासत और आधुनिकता का अंतर : कोलकाता के पुराने रेलवे स्टेशनों की तुलना में यह स्टेशन पूरी तरह आधुनिक ढांचे पर आधारित है। हावड़ा स्टेशन (1854) भारत के सबसे पुराने और व्यस्ततम स्टेशनों में से एक है और पूर्वी भारत की पहली यात्री ट्रेन का टर्मिनल भी रहा है। वहीं सियालदह स्टेशन (1869) भी ऐतिहासिक महत्व रखता है और प्रतिदिन लाखों यात्रियों की आवाजाही का केंद्र है। इसके विपरीत, कोलकाता (चितपुर) स्टेशन को आधुनिक जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया गया है, जहां यात्री सुविधाओं, बेहतर प्लेटफॉर्म प्रबंधन और सुगम बोर्डिंग व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है।
शहर का तीसरा बड़ा टर्मिनल : आज कोलकाता (चितपुर) स्टेशन शहर का तीसरा प्रमुख रेलवे टर्मिनल बन चुका है। यह न केवल उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण रेल संपर्क प्रदान करता है, बल्कि हावड़ा और सियालदह जैसे पुराने स्टेशनों पर भीड़ का दबाव कम करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में इस स्टेशन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है, क्योंकि बढ़ते रेल यातायात के साथ कोलकाता में ऐसे आधुनिक टर्मिनलों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।