‘जोड़ा फूल’ पर रोक, तृणमूल के दोनों गुटों को मिली नई पहचान

‘जोड़ा फूल’ पर रोक, तृणमूल के दोनों गुटों को मिली नई पहचान

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आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया

अंजलि भाटिया

नई दिल्ली :

तृणमूल कांग्रेस के पुराने नाम और चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ के इस्तेमाल पर फिलहाल रोक के बाद चुनाव आयोग ने शुक्रवार को दोनों गुटों को नई राजनीतिक पहचान दे दी। आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया है। वहीं, अरूप राय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला है। दोनों गुट अब आगामी उपचुनाव इन्हीं नए नाम और चिह्न के साथ लड़ेंगे। हालांकि, यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम है।दोनों गुटों के बीच मूल पार्टी ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम और वर्षों से पार्टी की पहचान रहे आरक्षित ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न पर दावे को लेकर विवाद चल रहा है। आयोग ने गुरुवार को अंतरिम निर्देश जारी करते हुए अंतिम फैसला होने तक दोनों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसके बाद दोनों खेमों को वैकल्पिक नाम और मुक्त चुनाव चिह्न चुनने को कहा गया।ममता खेमे ने तीन नाम प्रस्तावित किए थे—‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’, ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ममता’ और ‘तृणमूल ममता कांग्रेस’। इनमें आयोग ने पहले नाम को मंजूरी दी। वहीं, दूसरे गुट के लिए ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न तय किया गया। दोनों गुट पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों तथा असम की नगांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में इन्हीं अंतरिम नाम और चिह्न के साथ मैदान में उतरेंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था अंतिम फैसला नहीं है। दोनों गुटों को पहली बार मतदाताओं के बीच अपने पुराने नाम और ‘जोड़ा फूल’ के बजाय नई पहचान के साथ उतरना होगा। हालांकि, मूल नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है।आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 और निर्वाचन चिन्ह आदेश के तहत अपने अवशिष्ट अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह अंतरिम व्यवस्था की है। आयोग के अनुसार, इसका उद्देश्य मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा, चुनाव प्रक्रिया की अखंडता बनाए रखना और विवाद के अंतिम निपटारे तक किसी पक्ष के साथ अनुचित पूर्वाग्रह से बचना है। आयोग ने साफ किया है कि यह आदेश नामांकन की वैधता या पार्टी की पहचान और संगठनात्मक नियंत्रण पर अंतिम फैसला नहीं है। नामांकन पत्रों की जांच संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत स्वतंत्र रूप से करनी होगी।
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