आस्था की 144 साल पुरानी कहानी: बर्मा से कोलकाता आने के दौरान तारणहार बने थे भगवान सत्यनारायण

साल 1884 में राजा शिवबक्श बागला ने तैयार किया था बड़ाबाजार में भगवान सत्यनारायण का मंदिर
आस्था की 144 साल पुरानी कहानी: बर्मा से कोलकाता आने के दौरान तारणहार बने थे भगवान सत्यनारायण
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : उत्तर कोलकाता के व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र बड़ाबाजार (कॉटन स्ट्रीट) में स्थित श्री श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर आस्था, विश्वास और परंपरा का 144 वर्ष पुराना जीवंत प्रतीक है। वर्ष 1884 में स्थापित यह जागृत मंदिर भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप को समर्पित है, जिन्हें समृद्धि प्रदान करने और संकटों को दूर करने वाला माना जाता है। मंदिर में भगवान के साथ माता महालक्ष्मी भी विराजमान हैं। यह मंदिर अपनी वार्षिक विराट फाल्गुन महोत्सव शोभायात्रा के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो बड़ाबाजार की ऐतिहासिक गलियों से धूमधाम के साथ निकलती है। इस वर्ष भी होली के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

नदी के रास्ते आया विश्वास : मंदिर की स्थापना की कथा उतनी ही प्रेरक है जितनी भावनात्मक। मंदिर ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी मधुसूदन बागला के अनुसार, करीब डेढ़ सदी पहले उनके पूर्वज राय बहादुर शिवबक्श बागला अपने परिवार के साथ बर्मा (अब म्यांमार) से कोलकाता आ रहे थे। उस समय वे नदी मार्ग से यात्रा कर रहे थे। यात्रा के दौरान उन्हें भीषण तूफानों और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा। नदी के बीच उठती ऊँची लहरों और अनिश्चित परिस्थितियों ने पूरे परिवार को संकट में डाल दिया। ऐसे कठिन क्षण में शिवबक्श बागला ने भगवान सत्यनारायण का स्मरण किया और सुरक्षित पार लगाने की प्रार्थना की। मान्यता है कि भगवान की कृपा से वे सभी बाधाओं को पार कर सकुशल कोलकाता पहुँच गए।

वचन से बना भव्य मंदिर : सुरक्षित पहुँचने के बाद बागला परिवार ने अपनी प्रतिज्ञा निभाई। वर्ष 1884 में राजा शिवबक्श बागला ने बड़ाबाजार में भगवान सत्यनारायण का भव्य मंदिर बनवाया। धीरे-धीरे यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बन गया। मंदिर में नियमित रूप से सत्यनारायण कथा, पूर्णिमा व्रत, विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है। व्यापारिक और सामाजिक दृष्टि से सक्रिय बड़ाबाजार क्षेत्र के लिए यह मंदिर आध्यात्मिक आधार स्तंभ के रूप में स्थापित है।

बर्मा में भी स्थापित है आस्था : मधुसूदन बागला ने बताया कि उनके पूर्वजों ने बर्मा में भी भगवान सत्यनारायण का मंदिर स्थापित किया था। इससे स्पष्ट होता है कि यह केवल एक पारिवारिक श्रद्धा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक परंपरा है। करीब 144 वर्षों बाद भी मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था पहले की तरह अडिग है। आज भी मंदिर के नाम से पूरे क्षेत्र की पहचान जुड़ी हुई है और फाल्गुन महोत्सव के समय बड़ाबाजार की गलियां भक्ति, उल्लास और परंपरा के रंग में रंग जाती हैं।


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