एम. सी. केजरीवाल विद्यापीठ में हावड़ा की प्रथम आधुनिक स्पेस लैबोरेटरी बनी

छात्रों में वैज्ञानिक सोच, इनोवेशन और खोज की भावना को बढ़ावा देना है उद्देश्य : किशन कुमार केजरीवाल
एम. सी. केजरीवाल विद्यापीठ में हावड़ा की प्रथम आधुनिक स्पेस लैबोरेटरी बनी
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : हावड़ा स्थित एम. सी. केजरीवाल विद्यापीठ में पहला स्पेस लैबोरेटरी का उद्घाटन किया गया जिससे अनुभव-आधारित शिक्षा का एक नया अध्याय शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर जाने-माने स्पेस साइंटिस्ट डॉ. देबाशीष चक्रवर्ती (पूर्व साइंटिस्ट और हेड (एप्लिकेशन्स), RRSC/ NRSC/ISRO, कोलकाता) शामिल हुए। इस प्रथम आधुनिक स्पेस लैबोरेटरी जो कि इंटरैक्टिव मॉडल, सिमुलेशन, प्रैक्टिकल एक्टिविटीज और खगोलीय अवलोकन की सुविधाओं से लैस है, छात्रों को सीखने का एक दिलचस्प और गहरा अनुभव देने के मकसद से बनाई गई है। उद्घाटन के बाद स्कूल ऑडिटोरियम में चेयरमैन किशन कुमार केजरीवाल ने कहा कि इस लैब की स्थापना स्कूल की उस यात्रा का हिस्सा है जिसका मकसद छात्रों में वैज्ञानिक सोच, इनोवेशन और खोज की भावना को बढ़ावा देना है अर्थात जो भविष्य में साइंटिस्ट या स्पेस लैब में काम करना चाहते हैं, उनके लिए यह सुनहरा मौका है। कार्यक्रम में डायरेक्टर नीलकंठ गुप्ता, प्रिंसिपल विश्वजीत मजुमदार, ट्रस्टी अभय केजरीवाल और एमसीकेवी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग के प्रिंसिपल डॉ. अभिजीत लाहिड़ी भी मौजूद थे। यह हावड़ा में अपनी तरह की पहली और राज्य की चुनिंदा लैबोरेटरी में से एक है। इस नई लैबोरेटरी को एक डायनामिक लर्निंग हब के तौर पर डिजाइन किया गया है। छात्रों को दिए अपने ज्ञानवर्धक संबोधन में डॉ. चक्रवर्ती ने बंगाल में स्कूल स्तर पर ऐसी पहल शुरू होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि जहां पूरे देश में स्पेस एजुकेशन के क्षेत्र में अहम विकास हो रहे हैं, वहीं बंगाल के एक स्कूल का ऐसा प्रगतिशील कदम उठाना उत्साहजनक है। उन्होंने छात्रों को भविष्य के करियर विकल्प के तौर पर स्पेस साइंस को जानने-समझने के लिए प्रेरित किया और इस बात पर जोर दिया। भारत के स्पेस प्रोग्राम के जनक विक्रम साराभाई के योगदान पर प्रकाश डालने के अलावा उन्होंने छात्रों को इंडियन स्पेस प्रोग्राम के विभिन्न क्षेत्रों - जैसे लॉन्च व्हीकल, स्पेस मिशन और अलग-अलग तरह के सैटेलाइट और उनके उद्देश्यों के बारे में भी जानकारी दी।

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