मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा : हावड़ा स्टेशन अब सिर्फ एक रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि पूर्व भारत की धड़कन बन चुका है। एक ऐसा स्थान जहाँ हर दिन लाखों लोगों की उम्मीदें, विदाई के आंसू और पुनर्मिलन की खुशियाँ एक साथ जीवित होती हैं। पिछले एक दशक में हुए व्यापक विकास कार्यों ने इस ऐतिहासिक स्टेशन को पूरी तरह नए रूप में ढाल दिया है।
प्लेटफॉर्म विस्तार से बदली यात्रा की तस्वीर : यात्रियों की सुविधा को केंद्र में रखते हुए प्लेटफॉर्मों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया है। प्लेटफॉर्म नंबर 15, जो पहले 312 मीटर का था, अब बढ़कर 591 मीटर हो गया है। प्लेटफॉर्म नंबर 14 को 581 मीटर तक विस्तारित किया गया है। प्लेटफॉर्म नंबर 24 अब 635 मीटर लंबा है, जिस पर लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। प्लेटफॉर्म नंबर 16 को भी आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है। इन बदलावों के बाद अब 22 से 24 कोच वाली लंबी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें आसानी से इन प्लेटफॉर्मों पर आ-जा सकेंगी, जिससे यात्रियों को लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत मिलेगी।
भविष्य की तैयारी: और प्लेटफॉर्म होंगे बड़े : पूर्व रेलवे के अनुसार, प्लेटफॉर्म नंबर 10, 11, 12 और 13 को भी क्रमशः 542, 591 और 547 मीटर तक बढ़ाने की योजना है। जल्द ही प्लेटफॉर्म 1, 8, 10, 11, 12, 13, 14 और 15 को 22-कोच वाली आधुनिक LHB ट्रेनों के संचालन के लिए पूरी तरह तैयार कर दिया जाएगा।
यात्रियों के आराम का नया अनुभव : स्टेशन पर सिर्फ प्लेटफॉर्म ही नहीं, बल्कि यात्रियों के आराम का भी खास ध्यान रखा गया है।पुराने और नए कॉम्प्लेक्स में दो अत्याधुनिक एग्जीक्यूटिव लाउंज बनाए गए हैं। अपर क्लास वेटिंग हॉल में 3 करोड़ रुपये की लागत से दो नए लिफ्ट लगाए गए हैं। बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और भारी सामान वाले यात्रियों के लिए सुविधाएं पहले से बेहतर हुई हैं।
मेट्रो और आधुनिक कनेक्टिविटी से बढ़ी रफ्तार : हावड़ा की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देते हुए ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर (8,574.98 करोड़ रुपये) अब हावड़ा मैदान को साल्ट लेक से जोड़ रहा है। यह मेट्रो लाइन हुगली नदी के नीचे से गुजरती है और 2025 से चालू होने के बाद शहर के ट्रैफिक दबाव को काफी कम कर चुकी है।
हाईटेक ट्रेनों के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर : वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव के लिए 25 करोड़ रुपये की लागत से एक समर्पित मेंटेनेंस शेड तैयार किया गया है, जिससे इन ट्रेनों का संचालन और भी सुचारु होगा। इसके साथ ही स्टेशन के आसपास नए पुलों और सड़कों का निर्माण भी क्षेत्र के विकास को नई गति दे रहा है।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा : जब हम किसी प्लेटफॉर्म का विस्तार करते हैं या नया लाउंज बनाते हैं, तो हम उस अंतिम यात्री के बारे में सोचते हैं। वह बेटी, वह मरीज, या वह मजदूर। हावड़ा में हो रहा हर काम यही बताता है कि हम परवाह करते हैं।
इतिहास से भविष्य की ओर : 1854 में स्थापित हावड़ा स्टेशन आज भी देश के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में गिना जाता है। अब यह स्टेशन केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की आधुनिक, सुरक्षित और यात्री-केंद्रित यात्रा का प्रतीक बन चुका है।