हावड़ा मंडल ने यात्री सुरक्षा और निर्बाध रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक मानसून तैयारी अभियान शुरू किया

हावड़ा मंडल ने यात्री सुरक्षा और निर्बाध रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक मानसून तैयारी अभियान शुरू किया
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कोलकाता : वर्ष 2026 के मानसून के चरम मौसम से पहले, पूर्व रेलवे ने अपनी अवसंरचना की सुरक्षा तथा सुरक्षित एवं निर्बाध रेल परिचालन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक श्री मिलिंद देऊस्कर के निर्देशन में इंजीनियरिंग विभाग ने महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना सुधार कार्य शुरू किए हैं तथा चौबीसों घंटे गश्त की व्यवस्था की है। इन सक्रिय उपायों का उद्देश्य जलभराव की आशंका को समाप्त करना, पटरियों को क्षति से बचाना तथा भारी वर्षा के दौरान क्षेत्र से गुजरने वाले यात्रियों की पूर्ण सुरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित करना है।

जमीनी स्तर पर कार्यों की निगरानी करते हुए हावड़ा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री विशाल कपूर ने सभी संवेदनशील सुरक्षा स्थलों पर व्यवस्थित निरीक्षण अभियान पर विशेष बल दिया। मंडल ने चिन्हित 16,761.8 मीटर लंबी सभी नालियों की सफाई का कार्य 100 प्रतिशत पूरा कर लिया है, जिससे पटरियों से वर्षा का पानी सुचारु रूप से निकाला जा सके। इसके अतिरिक्त, पटरियों एवं ओवरहेड विद्युत उपकरणों के लिए जोखिम उत्पन्न करने वाले 7,647 पेड़ों में से 7,623 की छंटाई पूरी कर ली गई है, जबकि शेष 24 पेड़ों की छंटाई 30 जून, 2026 तक पूरी कर ली जाएगी।

यात्रियों को बारिश से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से 195 स्टेशनों पर स्थित 1,493 प्लेटफॉर्म शेड इकाइयों का निरीक्षण किया गया। इनमें पाई गई 397 कमियों में से 82 प्रतिशत का निराकरण किया जा चुका है तथा शेष कार्य 30 जून, 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके अलावा, 51 संवेदनशील सीमित ऊंचाई वाले सबवे, रोड अंडर ब्रिज तथा सबवे का निरीक्षण किया गया। इनमें से 10 स्थानों पर सुधार कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष स्थानों पर कार्य प्रगति पर है। इन सभी स्थलों पर जलभराव की निगरानी के लिए चौबीसों घंटे गश्ती कर्मचारी तैनात किए गए हैं।

रेल परिचालन की सुरक्षा बनाए रखने के लिए अग्रिम पंक्ति के गश्ती कर्मचारियों हेतु स्थायी आश्रय-स्थलों (शेल्टर हट्स) का निर्माण किया जा रहा है, जिससे खराब मौसम में भी वे प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियाँ निभा सकें। भारतीय रेलवे स्थायी मार्ग नियमावली के दिशा-निर्देशों के अनुसार कम जोखिम वाले सेक्शन, संवेदनशील स्थानों, कमजोर तटबंधों तथा संवेदनशील संरचनाओं पर चौबीसों घंटे गहन गश्त की व्यवस्था की गई है। 25 जून, 2026 तक की स्थिति के अनुसार:

मानसून का पूर्व अनुभव न रखने वाले 11 नए सीमित ऊँचाई वाले सबवे सेक्शनों पर 10 चौबीसों घंटे गश्त दल तैनात हैं, जिनमें से 9 जीपीएस-सुसज्जित हैं।

पिछले मानसून का अनुभव रखने वाले 2 सीमित ऊँचाई वाले सबवे सेक्शनों पर 2 चौबीसों घंटे गश्त दल तैनात हैं और दोनों जीपीएस-सुसज्जित हैं।

जलभराव संभावित 4 सीमित ऊँचाई वाले सबवे स्थलों पर 3 चौबीसों घंटे गश्त दल तैनात हैं, जो सभी जीपीएस-सुसज्जित हैं।

इसके अतिरिक्त, 30 किमी प्रति घंटे की गति-सीमा वाले 54 सावधानी स्थलों पर 53 चौबीसों घंटे गश्त दल (53 जीपीएस-सुसज्जित), 48 कमजोर तटबंध एवं कमजोर संरचना स्थलों पर 28 चौबीसों घंटे गश्त दल (27 जीपीएस-सुसज्जित) तथा 24 अन्य सावधानी स्थलों पर 14 चौबीसों घंटे गश्त दल (13 जीपीएस-सुसज्जित) तैनात किए गए हैं।

नवचिह्नित सीमित ऊँचाई वाले सबवे, जलभराव वाले क्षेत्रों तथा कमजोर संरचनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहाँ जीपीएस-सुसज्जित गश्ती कर्मचारियों के माध्यम से वास्तविक समय (रियल-टाइम) में निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। इसके अलावा, सभी पीक्यूआरएस ब्रिज एवं ब्लॉक मेंटेनेंस (BCM) स्थलों पर चौबीसों घंटे निरंतर गश्त अनिवार्य की गई है, ताकि संवेदनशील स्थानों पर कड़ी निगरानी बनी रहे।

इन भौतिक तैयारियों के साथ-साथ यात्रियों की अधिकतम सुविधा के लिए एक सुदृढ़ आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था भी स्थापित की गई है। जलभराव संभावित ट्रैक स्थलों पर आपातकालीन पंप पहले से उपलब्ध करा दिए गए हैं। संवेदनशील सीमित ऊँचाई वाले सबवे एवं सावधानी स्थलों पर विशेष निगरानी दल सक्रिय हैं, जो जीपीएस आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से वास्तविक समय की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

इंजीनियरिंग, सिग्नल एवं दूरसंचार, विद्युत (ओएचई) तथा परिचालन विभागों के बीच समन्वित कार्य प्रणाली पूरी तरह सक्रिय कर दी गई है, ताकि प्रतिकूल मौसम की स्थिति में त्वरित एवं संयुक्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। यात्रियों की निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सभी सहायक इंजीनियर एवं वरिष्ठ अनुभाग इंजीनियर/स्थायी मार्ग कार्यालयों को हाई अलर्ट पर रखा गया है तथा ट्रैक विफलता, जलभराव एवं पुलों से संबंधित किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटने हेतु स्पष्ट एस्केलेशन प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शिबराम माझि ने कहा का-"यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से हमने चौबीसों घंटे जीपीएस-सुसज्जित गश्त तथा व्यापक आधारभूत संरचना सुदृढ़ीकरण के उपाय किए हैं। पूर्व रेलवे मानसून के दौरान मौसम संबंधी बाधाओं को न्यूनतम करने और यात्रियों की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।"

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