हावड़ा नगर निगम में की गयी बैठक
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हावड़ा में नगर निकाय चुनाव की तैयारी तेज, वार्ड बढ़कर 68
पुनर्विन्यास के बाद 23 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव
30 सितंबर तक आपत्तियां दर्ज कराने का मौका
डुमुरजला इंडोर स्टेडियम में पहुंचने लगे चुनावी उपकरण और मशीनें
मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा :
दुर्गापूजा से पहले ही हावड़ा में नगर निकाय चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। हावड़ा नगर निगम के वार्डों के आरक्षण का मसौदा जारी कर दिया गया है। इसके मुताबिक, पुनर्विन्यास के बाद नगर निगम के वार्डों की संख्या 50 से बढ़ाकर 68 कर दी गई है। इनमें 23 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है। आरक्षण और वार्ड परिसीमन से संबंधित मसौदा सभी राजनीतिक दलों को भेज दिया गया है। किसी दल को इस पर आपत्ति या सुझाव है तो वह 30 सितंबर तक हावड़ा के जिलाधिकारी तथा चुनाव अधिकारी के समक्ष दर्ज करा सकता है।
50 वार्ड से बढ़कर 68 हुई संख्या
हावड़ा नगर निगम में वार्डों की संख्या पहले 50 थी। वर्ष 2015 में बाली नगरपालिका को हावड़ा के साथ जोड़े जाने के बाद वार्डों की संख्या बढ़कर 66 हो गई थी। हालांकि, वर्ष 2021 में बाली को अलग कर दिया गया और हावड़ा नगर निगम में फिर 50 वार्ड रह गए। अब इन्हीं 50 वार्डों का पुनर्विन्यास कर 68 वार्ड बनाए गए हैं।
डुमुरजला में पहुंचने लगे चुनावी उपकरण
जिला प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक, चुनाव की तैयारियों के तहत शुक्रवार को विश्वकर्मा पूजा के दिन से ही डुमुरजला इंडोर स्टेडियम में विभिन्न चुनावी सामग्री और मतदान मशीनें पहुंचने लगी हैं। इससे नगर निकाय चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों में तेजी आने के संकेत मिल रहे हैं।
तृणमूल में टिकट को लेकर अभी सुस्ती
दूसरी ओर, हावड़ा में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चुनावी गतिविधियां फिलहाल अपेक्षाकृत धीमी नजर आ रही हैं। आम तौर पर नगर निकाय चुनाव के दौरान टिकट पाने के लिए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में जो उत्साह और प्रतिस्पर्धा दिखाई देती है, वह इस बार फिलहाल नजर नहीं आ रही है। पार्टी के अलग-अलग धड़ों के बीच भी अभी खास सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है।पार्टी के कुछ नेताओं के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि क्या सभी 68 वार्डों में उम्मीदवार उतारे जा सकेंगे। पूर्व मेयर परिषद सदस्य और पार्षदों के दोबारा चुनाव लड़ने को लेकर भी अभी स्पष्टता नहीं है। तृणमूल के कुछ स्थानीय नेताओं के बीच सभी वार्डों में उम्मीदवार नहीं उतार पाने और अनौपचारिक समझौते के जरिए चुनाव लड़ने की चर्चा है। हालांकि, ऐसा कोई समझौता वास्तव में होगा या नहीं, इसे लेकर पार्टी के भीतर ही असमंजस बना हुआ है।

