

मेघा/सतीश, सन्मार्ग संवाददाता
हुगली : हुगली का प्रसिद्ध तारकेश्वर मंदिर एक बार फिर बड़े बदलाव की चर्चा में है। इसे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मॉडल की तर्ज पर विकसित करने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि आगामी 20 जून को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाबा तारकनाथ के दर्शन के लिए तारकेश्वर पहुंच सकते हैं। इस संभावित दौरे को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। तारकेश्वर धाम पश्चिम बंगाल के सबसे प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है, जहां भगवान शिव की पूजा “बाबा तारकनाथ” के रूप में की जाती है।
तारकेश्वर मंदिर का इतिहास : हुगली जिले में स्थित तारकेश्वर मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है। इसे 1729 ईस्वी में राजा भरमल्ला द्वारा स्थापित किया गया था। यह मंदिर पारंपरिक बंगाली “आठ-चाला” वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसे स्वयंभू शिवलिंग माना जाता है, जहां “बाबा तारकनाथ” के रूप में भगवान शिव की पूजा होती है। लोककथा के अनुसार, एक स्थानीय ग्वाला (विष्णु दास) की गाय जंगल में एक विशेष स्थान पर स्वतः दूध गिराती थी। बाद में खुदाई करने पर वहां एक शिवलिंग प्रकट हुआ। मान्यता है कि स्वप्न में भगवान शिव के निर्देश मिलने के बाद राजा भरमल्ला ने 1729 ईस्वी में इस स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर परिसर के उत्तर में स्थित “दुधपुकुर तालाब” को पवित्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस तालाब में श्रद्धा के साथ स्नान करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। श्रावण मास में यहां लाखों कांवरिए और श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। 1924 में मंदिर के कुप्रबंधन को सुधारने के लिए “तारकेश्वर सत्याग्रह” भी चलाया गया था।
काशी मॉडल की चर्चा: विकास की नई रूपरेखा :भाजपा सरकार के आने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा मंदिर के दौरे के दौरान विकास को लेकर बयान दिए जाने के बाद चर्चाएं तेज हो गई हैं। कहा जा रहा है कि मंदिर के सौंदर्यीकरण और स्वरूप परिवर्तन की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बाबा तारकनाथ के दर्शन किए। अब आगामी 20 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित आगमन को लेकर चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है। इन घटनाक्रमों के बीच यह चर्चा तेज है कि तारकेश्वर धाम को भी वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर मॉडल की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है।
महंत का पक्ष : तारकेश्वर मंदिर के महंत महाराज ने सन्मार्ग से कहा कि उन्हें सरकार की ओर से प्रस्तावित किसी विस्तृत योजना की पूरी जानकारी नहीं है। उनके अनुसार, यह बातें अधिकतर मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से सामने आई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर प्रशासन की प्राथमिकता हमेशा श्रद्धालुओं की सुविधा रही है। श्रावण मास में भारी भीड़ के बावजूद अब तक किसी भी श्रद्धालु को गंभीर समस्या नहीं हुई है, जो भगवान भोलेनाथ की कृपा से संभव हो पाया है।
प्रशासनिक व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण : तारकेश्वर धाम में हर वर्ष श्रावण मास के दौरान भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन मिलकर भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में सक्रिय रहते हैं। मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, मार्ग नियंत्रण और आपातकालीन प्रबंधन को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन मिल सके। मंदिर महंत ने इस अवसर को “गौरव का विषय” बताया और कहा कि यह पहली बार होगा जब प्रधानमंत्री तारकेश्वर धाम आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं, इसलिए यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विकास की मांग या नया कॉरिडोर? : स्थानीय विधायक संतु पान ने कहा कि वे स्वयं भगवान भोलेनाथ के भक्त हैं और तारकेश्वर कॉरिडोर का निर्माण जनता की लंबे समय से मांग रही है। उनका मानना है कि यदि काशी की तरह यहां विकास होता है, तो यह श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा उपहार होगा।
काशी विश्वनाथ मॉडल की खूबियां : हाल के वर्षों में Kashi Vishwanath Temple कॉरिडोर परियोजना के बाद मंदिर परिसर में कई बड़े बदलाव हुए हैं—
भीड़ प्रबंधन में सुधार
चौड़े पैदल मार्ग
साफ-सुथरा और विस्तृत परिसर
श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन व्यवस्था
गंगा घाट से सीधा संपर्क
इसी मॉडल को तारकेश्वर में लागू करने की चर्चा ने स्थानीय स्तर पर उम्मीदें बढ़ा दी हैं।