इंदौर में जहरीले पानी से मौतों के बाद बंगाल में चिंता, मंत्री ने दिया भरोसा

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उलुबेरिया : मध्यप्रदेश के इंदौर में जहरीला पानी पीने से अब तक कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सौ से अधिक लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नगर निगम की ओर से सप्लाई किए गए पेयजल में विषाक्त पदार्थ मिल जाने से यह दर्दनाक घटना घटी। भले ही इस घटना का बंगाल से सीधा कोई संबंध नहीं है, लेकिन इसके बाद राज्य में भी लोगों की चिंता बढ़ गई है। कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि कोलकाता नगर निगम, केएमडीए या पीएचई के माध्यम से पाइपलाइन से घर-घर जो पानी सप्लाई किया जाता है, वह कितना सुरक्षित है? क्या यहां भी इंदौर जैसी किसी विषाक्तता की आशंका हो सकती है?

इस पर राज्य के जनस्वास्थ्य एवं तकनीकी विभाग के मंत्री पुलक राय ने शुक्रवार को आश्वस्त करते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल में घर-घर पेयजल की आपूर्ति बेहद सुव्यवस्थित तरीके से की जाती है। पानी की नियमित जांच होती है और इस मामले में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाती।”

इस मुद्दे पर मंत्री पुलक राय ने भाजपा पर भी निशाना साधा। कुछ दिन पहले उनके विधानसभा क्षेत्र उलुबेरिया दक्षिण में आयोजित एक पार्टी बैठक में केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने इंदौर को देश का सबसे बेहतर शहर बताया था। इस पर कटाक्ष करते हुए पुलक राय ने कहा, “इतने लोगों की मौत के बाद अब सुकांत मजूमदार क्या कहेंगे?”

विभिन्न नगरपालिकाओं के चेयरमैनों ने भी बताया कि पेयजल आपूर्ति को लेकर साल भर सख्त निगरानी रखी जाती है और मध्यप्रदेश की घटना से सबक लेकर सतर्कता और बढ़ाई जा रही है। उलुबेरिया नगरपालिका के चेयरमैन अभय दास ने बताया कि उलुबेरिया नगर के 32 वार्डों में दक्षिण जगदीशपुर जल परियोजना से पानी की आपूर्ति होती है, जिसे वितरण से पहले नगरपालिका के इंजीनियर अच्छी तरह जांचते हैं।

श्रीरामपुर नगरपालिका में जल विभाग के चेयरमैन-इन-काउंसिल गौरमोहन दे ने कहा कि जिस प्लांट से पानी सप्लाई किया जाता है, वहां बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक है। 24 घंटे सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं और पानी की जांच के लिए अपनी लैब भी मौजूद है।

हुगली के वैद्यबाटी नगराध्यक्ष पिंटू महतो ने कहा कि मध्यप्रदेश में पेयजल विषाक्तता से हुई मौतों से वे भी चिंतित हैं। यहां पानी की जांच के बाद ही उसे घरों तक भेजा जाता है और हर 15 दिन में बैरकपुर की एक निजी लैब में पानी के नमूने भेजकर परीक्षण कराया जाता है।

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