चुनाव की घोषणा से पहले ही स्कूलों में केंद्रीय बल, पढ़ाई पर संकट

मतदान, मतगणना और नयी सरकार बनने के बाद ही खुलेंगे स्कूल
चुनाव की घोषणा से पहले ही स्कूलों में केंद्रीय बल, पढ़ाई पर संकट
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य में विधानसभा चुनाव की आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है, लेकिन कई जिलों के स्कूलों में पहले से ही केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती शुरू हो गई है। इसका असर सीधे तौर पर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई स्कूल पूरी तरह बंद हैं, तो कहीं वैकल्पिक दिनों में कक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। 1 से 10 अप्रैल के बीच स्कूलों में पहली समेटिव परीक्षा होनी है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए प्रधानाचार्यों ने छात्रों और अभिभावकों को साफ कह दिया है कि अभी स्कूल खुलने की संभावना नहीं है। मतदान, मतगणना और नयी सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्कूल दोबारा खुल पाएंगे।

कोलकाता, हावड़ा और हुगली समेत राज्य के कई जिलों में यही स्थिति देखने को मिल रही है। बाईपास के पास स्थित वीआईपी नगर हाई स्कूल में सोमवार से केंद्रीय बलों की तैनाती कर दी गई है। इसके कारण स्कूल प्रशासन को पूरी तरह छुट्टी घोषित करनी पड़ी। जब तक स्कूल बंद रहेगा, तब तक ऑनलाइन कक्षाएं चलाने की योजना बनाई गई है। स्कूल के प्रधानाचार्य दीपेन कुमार साहू ने बताया कि पांचवीं से बारहवीं तक करीब 700 छात्र यहां पढ़ते हैं। अधिकतर छात्र-छात्राएं ऐसे परिवारों से आते हैं जहां मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा सीमित है। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई उनके लिए मुश्किल साबित हो रही है। मध्य हावड़ा के विवेकानंद इंस्टीट्यूशन में भी केंद्रीय बलों ने स्कूल के नये भवन को अपने कब्जे में ले लिया है। यहां पुरुष और महिला दोनों जवान ठहरे हुए हैं। मैदान में उनके खाने-पीने की व्यवस्था की गई है, जिसे तिरपाल से ढका गया है। इस स्कूल में करीब 2465 छात्र पढ़ते हैं।प्रधानाचार्य शतदल गायेन ने कहा कि प्रशासन से कई बार अनुरोध किया गया था कि ऐसे स्कूलों को चुना जाए जहां छात्रों की संख्या कम है, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। इससे पढ़ाई का काफी नुकसान हो रहा है। हुगली के कमारपुकुर सतबेड़िया हाई स्कूल में भी केंद्रीय बलों की तैनाती के कारण फिलहाल पढ़ाई बंद है और स्कूल कब खुलेगा, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। वहीं जोधपुर पार्क ब्वायज स्कूल के प्रधानाचार्य अमित सेन मजुमदार ने बताया कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि उनके स्कूल को कब केंद्रीय बलों के लिए लिया जाएगा, लेकिन तैयारी शुरू हो चुकी है। इस स्थिति से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि चुनाव की प्रक्रिया लंबी खिंचने पर पढ़ाई पर और अधिक असर पड़ने की आशंका है।

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