इलेक्ट्रोस्टील जल सेवक सम्मान 2025 ने जल संरक्षण में बदलाव लाने वालों को किया सम्मानित

इलेक्ट्रोस्टील जल सेवक सम्मान 2025 ने जल संरक्षण में बदलाव लाने वालों को किया सम्मानित
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कोलकाता: इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स लिमिटेड ने अपने बहुप्रतीक्षित पुरस्कार समारोह के तीसरे संस्करण, इलेक्ट्रोस्टील जल सेवक सम्मान 2025का आयोजन किया। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों और संस्थानों को मान्यता देता है जो जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रभावशाली बदलाव ला रहे हैं। जल सेवक सम्मान 2025 ने भारत भर में जल संरक्षण, स्थिरता और समान जल उपलब्धता के प्रति समर्पित नायकों को पहचानने की अपनी भावना को कायम रखा है।

इस भव्य पुरस्कार समारोह की शोभा बढ़ायी न्यायमूर्ति के. जी. बालाकृष्णन, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय धर्मांतरण आयोग के अध्यक्ष ने, जो मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे पी. एम. प्रसाद, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, कोल इंडिया और डॉ धृति बनर्जी, निदेशक, प्राणी सर्वेक्षण भारत। विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे नेलपटला अशोक बाबू, निदेशक, राष्ट्रीय जल मिशन, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार। इस आयोजन में कई विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों, उद्योग जगत के नेताओं, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और सामुदायिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति भी रही।

व्यक्तिगत श्रेणी में, जल सेवक सम्मान 2025 पश्चिम बंगाल की लीलाबती महता को प्रदान किया गया, जिन्होंने झाड़ग्राम में तालाब आधारित जल एवं मृदा संरक्षण की जमीनी पहल का नेतृत्व किया, जिससे सिंचाई, फसल विविधीकरण और किसानों की आय में वृद्धि हुई। स्व-सहायता समूहों के साथ अपने कार्य के माध्यम से उन्होंने 500से अधिक महिलाओं को जल प्रशासन में शामिल किया और 85 गांवों के 1,250 से अधिक परिवारों को टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ अपनाने में सक्षम बनाया। झारखंड के जेम्स हेरेंज को पारंपरिक जल निकायों को पुनर्जीवित करने और आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के उनके समर्पित प्रयासों के लिए उपविजेता के रूप में मान्यता दी गयी। चेक डैम और स्थायी नहरों का निर्माण करके उन्होंने 200 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई सुनिश्चित की, जिससे फसल की पैदावार बढ़ी और सूखे की संवेदनशीलता घटी। उनकी पहलों, जिनमें हासातु चेक डैम और बरियातु नहर शामिल हैं, जिन्होंने एक दशक से अधिक समय से चार गांवों को सहारा दिया है, जल सुरक्षा और कृषि पुनरुद्धार के स्थायी मॉडल के रूप में खड़ी हैं।

संगठन श्रेणी में, यह पुरस्कार बिहार के आपका अंचल को प्रदान किया गया, जिसने स्थायी गांव-स्तरीय जल मॉडल बनाने में अग्रणी प्रयास किये। तालाब निर्माण और सिंचाई पुनर्स्थापन के माध्यम से सालभर जल उपलब्धता सुनिश्चित करके, इस पहल ने कृषि उत्पादकता को मजबूत किया, भूजल स्तर में सुधार किया और लगभग 100 ग्रामीण महिलाओं को संरक्षण में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाया। जैविक खेती, सूक्ष्म जलग्रहण प्रणालियों और वृक्षारोपण जैसे पारिस्थितिक पुनर्स्थापन उपायों के माध्यम से, आपका आंचल सतत कृषि को प्रोत्साहित कर रहा है और गाँव समुदायों के लिये दीर्घकालीन मृदा एवं जल संसाधनों को सुरक्षित कर रहा है। उपविजेता की मान्यता ओडिशा की "एसोसिएशन फॉर डेवलपमेंट एंड रिसर्च इन सोशियो इकोनॉमिक एक्टिविटीज़ (आदर्शा)" को प्रदान की गयी, इसके समेकित जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए। भूजल पुनर्भरण में सुधार, बहु-ऋतु खेती को सक्षम बनाने और जलवायु-लचीली सिंचाई को बढ़ावा देने के माध्यम से, आदर्शा ने मृदा की उर्वरता बढ़ायी, खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया और सतत जल संसाधनों के सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा दिया।

आजीवन उपलब्धि पुरस्कार झारखंड के साइमन ओरांव को प्रदान किया गया, जिन्हें "झारखंड के जलपुरुष" के रूप में जाना जाता है, चेक डैम बनाने और 51 गांवों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति उनके आजीवन समर्पण के लिए। उनके प्रयासों ने बहु-फसली खेती को सक्षम बनाया, पारंपरिक संरक्षण प्रथाओं को पुनर्जीवित किया और समुदायों को सशक्त बनाया, जिससे स्थायी, समुदाय-आधारित जल प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल स्थापित हुआ।

"जल सेवक सम्मान के माध्यम से, हम उन गुमनाम नायकों की आवाज़ को मनाना और प्रसारित करना चाहते हैं जो जल क्षेत्र में बदलाव की लहरें पैदा कर रहे हैं। इस वर्ष के विजेता हमारे इस विश्वास की पुन: पुष्टि करते हैं कि समुदाय-नेतृत्व वाली कार्रवाई, वैज्ञानिक नवाचार, सामूहिक प्रयास और उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता ही जल-सुरक्षित भविष्य की सच्ची राह हैं। इलेक्ट्रोस्टील में, हम पूरे देश में इन परिवर्तनकर्ताओं के पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित करने के लिए समर्पित हैं," कहा सुनील कटियाल, पूर्णकालिक निदेशक एवं सीईओ, इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स लिमिटेड ने।

शाम एक विचारोत्तेजक और आकर्षक चर्चा की साक्षी रही, "जल मंथन - द वाटर समिट",एक गतिशील ज्ञान-साझा मंच जिसने विचार नेताओं, नवप्रवर्तकों, नीति-निर्माताओं, पर्यावरणविदों और युवाओं को एक साथ लाया, जल संरक्षण के महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर किया। इस शिखर सम्मेलन में दो प्रमुख सत्र शामिल थे - "जल प्रवाह", जिसमें विशिष्ट वक्ता डॉ. कल्याण रुद्र, अध्यक्ष, पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अविनाश मिश्रा, सलाहकार (जल संसाधन एवं भूमि संसाधन, सूचना एवं प्रसारण, संस्कृति, पंचायती राज, प्राकृतिक संसाधन तथा पर्यावरण प्रकोष्ठ) नीति आयोग (भारत सरकार), रंजन के. पांडा, ओडिशा के जलपुरुष एवं जलवायु कार्यकर्ता, माधव केजरीवाल, पूर्णकालिक निदेशक, इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स लिमिटेड के साथ पैनल चर्चा और एक टेड शैली का टॉक - "जल वाणी" जिसे प्रियम बु​धिया, अध्यक्ष, पैटन ग्रुप और ज्योति शर्मा, संस्थापक, फोर्स ने प्रस्तुत किया। शाम का समापन सरोद वादक पद्मश्री पंडित तेजेंद्र नारायण मजूमदार के मंत्रमुग्ध कर देने वाले प्रदर्शन के साथ हुआ।

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