8 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’, सूझबूझ से बची हावड़ा के बुज़ुर्ग की 28 लाख की जमा पूंजी

digital arrest (symbolic)
डिजिटल अरेस्ट (सांकेतिक)
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : करीब 8 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर चली एक सुनियोजित साइबर ठगी की कोशिश से हावड़ा के 65 वर्षीय एक बुज़ुर्ग बाल-बाल बच गए। अंतरराष्ट्रीय ठग गिरोह ने कोलकाता नगर निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारी को निशाना बनाकर चरणबद्ध तरीके से मानसिक दबाव बनाया, लेकिन अंतिम समय में उनकी सूझबूझ और पुलिस की तत्परता से लगभग 28 लाख रुपये की ठगी टल गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मालीपांचघड़ा थाना क्षेत्र के निवासी बुज़ुर्ग को 20 जनवरी को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल महाराष्ट्र में कई फर्जी गतिविधियों में हुआ है। इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तारी की धमकी दी गई। डर का माहौल बनाकर उन्हें वीडियो कॉल पर लाया गया और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लगातार निगरानी में रखने का दावा किया गया। इतना ही नहीं, ठगों ने मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने की बात कहकर और अधिक भय पैदा किया। लगातार दबाव में आकर बुज़ुर्ग ने तीन बैंकों में जमा फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाकर लगभग 28 लाख रुपये अपने खाते में जमा कर लिये। बुधवार को जब उनसे रकम ट्रांसफर करने को कहा गया, तभी उन्हें संदेह हुआ। वीडियो कॉल चालू रखते हुए वे सीधे मालीपांचघड़ा थाने पहुंचे और पूरी जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही हावड़ा सिटी पुलिस की साइबर क्राइम टीम सक्रिय हो गई। तुरंत मोबाइल सिम हटवाया गया और तीनों बैंक खातों के यूपीआई विवरण बदल दिए गए, जिससे ठग पैसे निकाल नहीं सके। पुलिस का अनुमान है कि यह गिरोह कंबोडिया से संचालित हो रहा था। पुलिस ने आम लोगों, खासकर वरिष्ठ नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध फोन या वीडियो कॉल से घबराएं नहीं और तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।


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