108 साल की परंपरा कायम, नई समिति ने कराई बागबाजार सार्वजनिन की खूंटी पूजा

कोर्ट की दखल के बाद सुलझा समिति गठन का विवाद, धूमधाम से शुरू हुई दुर्गापूजा की तैयारी
An artist carefully shapes Goddess Durga’s face with clay at a workshop in Kumartuli, Kolkata, ahead of Durga Puja.
An artist carefully shapes Goddess Durga’s face with clay at a workshop in Kumartuli, Kolkata, ahead of Durga Puja.An artist carefully shapes Goddess Durga’s face with clay at a workshop in Kumartuli, Kolkata, ahead of Durga Puja.
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : 108 साल पुरानी बागबाजार सार्वजनिन दुर्गापूजा की परंपरा इस वर्ष भी कायम रहेगी। समिति गठन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद और अनिश्चितता के बीच रविवार को नई समिति की ओर से धूमधाम से खूंटी पूजा की गई। ढाक की थाप के बीच पूजा की तैयारियों का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

चुनाव में बराबरी से बढ़ा था विवाद

बागबाजार पूजा समिति के चुनाव को लेकर दो गुटों में लंबे समय से खींचतान चल रही थी। अदालत के निर्देश पर 30 अगस्त को दो विशेष पर्यवेक्षकों की निगरानी में चुनाव हुआ था। कुल 77 मतदाताओं में 66 ने मतदान किया। सचिव पद के दो प्रमुख उम्मीदवार और एक ही परिवार के दो भाई गौतम व भास्कर नियोगी को 33-33 वोट मिले। वहीं 12 कार्यकारिणी सदस्यों में चार उम्मीदवारों को 32-32 वोट मिलने से वहां भी स्थिति उलझ गई थी। बाद में मामला अदालत तक पहुंचा।

अदालत के फैसले के बाद तैयारियां तेज

समिति गठन को लेकर विवाद के बीच हाई कोर्ट में मामला पहुंचा था। मंगलवार को न्यायालय ने समिति गठन की प्रक्रिया को सही बताते हुए आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद पूजा की तैयारियों ने तेजी पकड़ी। पूजा समिति के सदस्यों ने कहा कि 108 साल की परंपरा और गौरव कायम रहेगा तथा चतुर्थी के दिन पूजा का उद्घाटन और भव्य तरीके से किया जाएगा।

1919 में हुई थी शुरुआत

बागबाजार की यह पूजा 1919 में ‘नेबूबागान बारोयारी दुर्गापूजा’ के नाम से शुरू हुई थी। बाद में इसका नाम बागबाजार सार्वजनिन दुर्गोत्सव हुआ। 1932 में इसे सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत किया गया। अब अदालत के निर्देश के बाद पारंपरिक शैली में एक बार फिर मां दुर्गा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं।


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