'एक शाम किताबों के नाम' कार्यक्रम में रचनात्मकता और संवेदनशील अभिव्यक्ति पर मंथन

'एक शाम किताबों के नाम' कार्यक्रम में रचनात्मकता और संवेदनशील अभिव्यक्ति पर मंथन
Published on

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय के तत्वावधान में शनिवार को आयोजित 'एक शाम किताबों के नाम' कार्यक्रम के छठे संस्करण में साहित्य, रचनात्मकता और संवेदनशील अभिव्यक्ति पर सार्थक चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यासागर सांध्य कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर अर्जुन ठाकुर ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में अर्जुन ठाकुर ने कहा कि रचनाकार अपनी भावनाओं को रचना के माध्यम से अभिव्यक्त करता है और रचनात्मकता के लिए संवेदनशील उद्वेलन आवश्यक है। उन्होंने चयनित पुस्तकों की विषयवस्तु, शिल्प और भाषा की विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि नई पीढ़ी की साहित्य के प्रति बढ़ती रुचि भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है। कार्यक्रम में परसमजीत कुमार पंडित की पुस्तक 'जितेंद्र श्रीवास्तव की कविताओं में स्त्री चेतना', मीतू कानोडिया की काव्य कृति 'हृदय पुष्प' तथा धर्म दुबे की पुस्तक 'कुछ अपनी कुछ आपकी' पर विशेष परिचर्चा हुई। विद्यासागर कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुकन्या कुमारी, बैरकपुर राष्ट्रीय सुरेंद्रनाथ कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम कुमार साव तथा ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड के कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) डॉ. आदित्य विक्रम सिंह ने प्रस्तुत कीं। कुमारसभा के अध्यक्ष महावीर प्रसाद बजाज ने कहा कि सत्संग और स्वाध्याय से स्वाभिमान का निर्माण होता है। कवि रमाकांत सिंह ने अपनी स्वर प्रस्तुति दी। संचालन डॉ. कमल कुमार ने किया, जबकि सत्यप्रकाश राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर बृजेश शर्मा, प्रदीप सुंदरवाल, नंदकुमार लड्डा, अरुणप्रकाश मल्लावत, मनोज काकड़ा, रामचंद्र अग्रवाल, रामपुकार सिंह, भगीरथ सारस्वत, ज्ञानप्रकाश पाण्डेय, सत्यप्रकाश दुबे, प्रदीप कुमार धानुक, रणजीत भारती, डॉ. मधु सिंह, देवप्रकाश गुप्ता, वीरेंद्र यादव, रामकेश सिंह, रविंद्रनाथ तिवारी, पन्नाकर व्यास, श्रीमोहन तिवारी, जीवन सिंह, गायत्री बजाज एवं अरुण कुमार सिंह सहित अनेक उपस्थित रहे।


Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in