

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सर्दियों के दौरान शहर की हवा के जहरीली होने के पीछे सिर्फ उत्सर्जन ही नहीं, बल्कि मौसम संबंधी परिस्थितियां और जलवायु परिवर्तन भी बड़ी वजह हैं। पर्यावरण थिंक टैंक Climate Trends की एक बहु-शहरी अध्ययन रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। दिल्ली और पटना अक्सर जहरीली हवा को लेकर सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन इस अध्ययन के अनुसार कोलकाता की प्रदूषण समस्या कहीं अधिक जटिल और चिंताजनक होती जा रही है।
ठहरे हुए मौसम ने बढ़ाई परेशानी : रिपोर्ट के अनुसार, कम हवा की गति, अधिक आर्द्रता और वायुमंडलीय परतों की कम ऊंचाई (मिश्रण ऊंचाई) जैसी स्थितियां प्रदूषण को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। सर्दियों में कमजोर वेंटिलेशन के कारण बायोमास और कचरा जलाने से निकलने वाले प्रदूषक जमीन के पास ही जमा हो जाते हैं। Aarti Khosla, निदेशक, क्लाइमेट ट्रेंड्स ने कहा, “डेटा साफ बताता है कि ठहरे हुए दिन में, भले ही उत्सर्जन नियंत्रित हो, प्रदूषण ऊंचा ही रहेगा। हमारी स्वच्छ वायु नीति को हर दिन को एक जैसा मानने की गलती बंद करनी होगी। मौसम को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) में शामिल करना वैज्ञानिक जरूरत है।”
दिल्ली-पटना जितना नहीं, लेकिन खतरा बरकरार : अध्ययन में पाया गया कि कोलकाता में पीएम 2.5 का स्तर Delhi और Patna जितना गंभीर नहीं है, लेकिन सर्दियों में लंबे समय तक ठहरी हुई वायुमंडलीय स्थिति के कारण प्रदूषण मध्यम से उच्च स्तर पर बना रहता है। बेंगलुरु और चेन्नई की तुलना में कोलकाता में मौसमी अंतर अधिक स्पष्ट है। वहीं दिल्ली और पटना की तुलना में यहां प्रदूषण के शिखर स्तर कम हैं, लेकिन मौसम संबंधी संवेदनशीलता लगभग समान है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
2024 और 2025 के आंकड़े सर्दियों में प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाते हैं:
सर्दी (दिसंबर-फरवरी) 2024: 80.9 माइक्रोग्राम/घन मीटर
सर्दी (दिसंबर-फरवरी) 2025: 77.2 माइक्रोग्राम/घन मीटर
हालांकि 2025 में औसत स्तर थोड़ा कम रहा, लेकिन मासिक उच्चतम स्तर चिंताजनक रहे। जनवरी 2024 में पीएम 2.5 का स्तर 99.7 माइक्रोग्राम/घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि दिसंबर 2025 में यह 95.7 माइक्रोग्राम/घन मीटर तक पहुंच गया।
इसके विपरीत, मानसून के दौरान स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
मानसून 2024: 20.3 माइक्रोग्राम/घन मीटर
मानसून 2025: 21.7 माइक्रोग्राम/घन मीटर
विशेषज्ञों की राय : Abhijit Chatterjee, वायुमंडलीय वैज्ञानिक, Bose Institute ने कहा कि बायोमास और कचरा जलाना सर्दियों में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। “स्थानीय और क्षेत्रीय स्रोत सर्दियों में कोलकाता के प्रदूषण में अहम भूमिका निभाते हैं।”वहीं वायु प्रदूषण विशेषज्ञ Abhinandan Ghosh ने चेतावनी दी कि पश्चिमी देशों के मानकों की अंधानुकरण से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “कोलकाता में केवल उत्सर्जन नहीं, बल्कि सर्दियों की बाउंड्री-लेयर की जटिल गतिशीलता गंभीर प्रदूषण घटनाओं को जन्म देती है।”
समाधान क्या? रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण रणनीतियों में केवल वार्षिक उत्सर्जन कटौती पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय डिस्पर्शन मॉडलिंग और मौसमीय विश्लेषण को शामिल करना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मौसम और जलवायु कारकों को नीति में समाहित नहीं किया जाएगा, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है।