टॉय ट्रेन पर टोक्यो के बुज़ुर्ग का आख़िरी दस्तावेज़ी सफ़र

टॉय ट्रेन पर टोक्यो के बुज़ुर्ग का आख़िरी दस्तावेज़ी सफ़र
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

सिलिगुड़ी: सफेद धुआं छोड़ती, सीटी बजाती हुई घुमावदार पहाड़ी पटरियों पर दौड़ती टॉय ट्रेन—यह दृश्य दुनिया भर के लोगों के लिए नॉस्टैल्जिया का प्रतीक है। इसी टॉय ट्रेन के प्रेम में बंधे जापान के टोक्यो निवासी 84 वर्षीय सेइया सुगावारा बीते 37 वर्षों से लगातार सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग आते रहे हैं। सुगावारा ने टॉय ट्रेन को लेकर एक भावनात्मक दस्तावेज़ी फ़िल्म की शूटिंग की। उम्र का भार अब इतना बढ़ गया है कि भविष्य में भारत आ पाना संभव होगा या नहीं, इसे लेकर वे असमंजस में हैं। इसी कारण इस बार उन्होंने ट्रेन में यात्रा नहीं की, बल्कि साथियों की मदद से टॉय ट्रेन और उसके आसपास के प्राकृतिक दृश्यों को कैमरे में कैद किया। सुगावारा पहली बार वर्ष 1971 में भारत आए थे। तब दार्जिलिंग देखने की इच्छा उन्हें सिलीगुड़ी तक ले आई थी। टॉय ट्रेन में पहली सवारी के बाद वे इतने मंत्रमुग्ध हुए कि फिर वर्षों तक बार-बार दार्जिलिंग आते रहे। पहाड़ों के मोड़ों, झरनों के पास ट्रेन को रोककर उन्होंने दस्तावेज़ी फ़िल्म के लिए शूटिंग की।

भावुक होते हुए सुगावारा ने कहा,

“1971 से मैं यहां आता रहा हूं। टॉय ट्रेन में बैठते ही मुझे उससे प्रेम हो गया। अब उम्र काफी हो गई है। शायद फिर कभी आ न सकूं। अपने देश में, अपने घर में बैठकर इस फ़िल्म को देखकर टॉय ट्रेन में न बैठ पाने की कमी को पूरा कर सकूंगा।”इस यात्रा के लिए जापान के छह नागरिकों ने ऑनलाइन पूरी टॉय ट्रेन किराए पर ली थी, जो कि काफी खर्चीला होता है। लेकिन ट्रेन किराए पर लेने के बावजूद जब यात्रियों ने उसमें बैठने से इनकार किया, तो रेलकर्मियों को भी आश्चर्य हुआ। बाद में सुगावारा के टॉय ट्रेन प्रेम की कहानी जानकर वे भावविभोर हो गए।

दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) के निदेशक ऋषभ चौधरी ने कहा,“कोई व्यक्ति दशकों से केवल टॉय ट्रेन की सवारी के लिए दार्जिलिंग आता रहे—ऐसी दीवानगी के किस्से हमने सुने थे। सुगावारा उन सभी के प्रतिनिधि जैसे हैं। ऐसे व्यक्ति को सम्मानित कर हम स्वयं को धन्य मानते हैं।”

दस्तावेज़ी फ़िल्म की शूटिंग के दौरान डीएचआर की ओर से जापानी दल को कर्सियांग स्थित डीएचआर मुख्यालय ‘एलिस विला’ ले जाया गया, जहां उनका औपचारिक सम्मान भी किया गया।


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