एक बच्चे के आँसू और एक महंगी सीख: पूर्व रेलवे में 15 रुपये बचाने की कोशिश आपके परिवार की शांति और सम्मान पर पड़ सकती है भारी

एक बच्चे के आँसू और एक महंगी सीख: पूर्व रेलवे में 15 रुपये बचाने की कोशिश आपके परिवार की शांति और सम्मान पर पड़ सकती है भारी
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कोलकाता : भीड़ भरे प्लेटफ़ॉर्म पर 8 वर्षीय अनुभव दे (परिवर्तित नाम) की आँखों में आँसू थे और वह सिसकते हुए बोला, "मैंने पापा से कई बार कहा कि वे अपने और मेरे लिए टिकट खरीद लें, लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं मानी।" उसके पिता सुब्रत दे (परिवर्तित नाम) शर्म से सिर झुकाए उसके बगल में खड़े थे। मात्र 15 रुपये बचाने के लिए सुब्रत ने सब कुछ दाँव पर लगा दिया था। अंततः उन्हें भारी जुर्माना भरना पड़ा, लेकिन आर्थिक नुकसान से भी अधिक पीड़ादायक था वह मानसिक तनाव और आघात, जो उनके मासूम बच्चे के चेहरे पर साफ झलक रहा था—एक ऐसी कीमत जिसे कभी पैसों में नहीं आंका जा सकता।

वर्षों से पूर्व रेलवे यात्रियों को लगातार जागरूक करने का प्रयास कर रहा है कि बिना टिकट यात्रा करना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि ऐसा कृत्य है जो व्यक्ति की गरिमा और सम्मान को भी प्रभावित करता है। पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक श्री मिलिंद देऊस्कर के गतिशील और दूरदर्शी नेतृत्व में अनेक जागरूकता अभियान और जनसंपर्क कार्यक्रम चलाए गए हैं। रेलवे कर्मचारियों ने स्वयं यात्रियों से संपर्क कर उनसे वैध टिकट खरीदने की अपील की है। इसके बावजूद, बिना टिकट यात्रा करने वालों की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक बनी हुई है, जिसके कारण प्रशासन को सघन टिकट जाँच अभियान चलाने पड़ रहे हैं।

टिकट न लेने या चोरी करने से संबंधित समस्या की गंभीरता 1 मई 2026 से 31 मई 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों से स्पष्ट होती है। इस एक माह की अवधि में हावड़ा मंडल में 86,601 बिना टिकट यात्रा के मामले पकड़े गए। वहीं, सियालदह मंडल में 46,591 मामले दर्ज किए गए। आसनसोल मंडल में यह संख्या 48,416 रही, जबकि मालदा टाउन मंडल में 30,945 बिना टिकट यात्रियों को पकड़ा गया। पूरे पूर्व रेलवे में इस एक माह के दौरान कुल 2,12,553 बिना टिकट यात्रा के मामले सामने आए।

सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि भारतीय रेलवे का किराया अन्य किसी भी परिवहन साधन की तुलना में अत्यंत सस्ता है। आज एक छोटी दूरी के लिए ऑटो-रिक्शा या टोटो का न्यूनतम किराया भी 10 रुपये है, जबकि पूर्व रेलवे का न्यूनतम किराया मात्र ₹5 है। बिना टिकट यात्रा की समस्या विशेष रूप से सियालदह मंडल के सियालदह दक्षिण खंड में अधिक देखी जाती है। उदाहरण के लिए, सियालदह से डायमंड हार्बर या कैनिंग तक का एकतरफा टिकट केवल 15 रुपये का है और पूरे महीने का मासिक सीजन टिकट मात्र 270 रुपये में उपलब्ध है। इसी प्रकार, खड़दह, मध्यमग्राम या सुभाषग्राम जैसे स्टेशनों के लिए, जहां एकल यात्रा किराया 5 रुपये है, मासिक सीजन टिकट केवल 100 रुपये का है। यह समझ से परे है कि यात्री अपने ही हित को क्यों नहीं समझते। टिकट खरीदना केवल एक नागरिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का भी बड़ा साधन है। यदि कोई यात्री बिना टिकट पकड़ा जाता है, तो उसे तत्काल न्यूनतम 500 रुपये का जुर्माना तथा नियमित किराया दोनों का भुगतान करना पड़ता है।

इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए पूर्व रेलवे 'रेलवे अधिनियम के कानूनी' प्रावधानों को सख्ती से लागू करता है, जिसके तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों को गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। धारा 137 के अंतर्गत, यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी के इरादे से बिना वैध टिकट के यात्रा करता है या पहले से उपयोग किए जा चुके टिकट/पास का पुनः उपयोग करता है, तो उसे यात्रा की गई दूरी का सामान्य किराया तथा उसके बराबर अतिरिक्त शुल्क देना होगा, जिसकी न्यूनतम राशि 500 रुपये निर्धारित है। यदि मांग किए जाने पर भुगतान नहीं किया जाता, तो सक्षम न्यायालय दोषी को छह माह तक का कारावास, 500 रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड दे सकता है। इसके अतिरिक्त, धारा 138 उन मामलों पर लागू होती है, जहां यात्री बिना वैध टिकट या पास के पाया जाता है, लेकिन धोखाधड़ी का स्पष्ट इरादा सिद्ध नहीं होता। इस धारा के तहत भी अतिरिक्त शुल्क और किराया वसूला जाता है, जिसकी न्यूनतम राशि 500रुपये या केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित राशि होती है।

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