4 साल बाद भी न्याय का इंतजार: अनीश खान की मौत के बाद परिवार की अकेली लड़ाई जारी

4 साल बाद भी न्याय का इंतजार: अनीश खान की मौत के बाद परिवार की अकेली लड़ाई जारी
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : 18 फरवरी 2022 की वह रात खान परिवार के लिए कभी न भरने वाला घाव बन गई। छात्र नेता अनीश खान की मौत के चार साल बाद भी परिवार न्याय की उम्मीद में दर-दर भटक रहा है। 18 फरवरी को परिवार ने अनीश की चौथी पुण्यतिथि मनाई, लेकिन इंसाफ की लड़ाई अब पहले से ज्यादा अकेली और थकाऊ हो चुकी है। अनीश के भाई साबिर खान का कहना है कि जो भीड़ कभी उनके घर के बाहर न्याय की मांग को लेकर जुटती थी, वह अब गायब हो चुकी है। “तीन महीने से कोई कोर्ट डेट नहीं मिली है। हमें डर है कि मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। चार साल हो गए, लेकिन आज भी कोई सलाखों के पीछे नहीं है। शुरू में पकड़े गए चार पुलिसकर्मी तीन महीने के भीतर जमानत पर बाहर आ गए। हमारे हाथ कुछ नहीं लगा,” साबिर ने कहा।

SIT की रिपोर्ट और परिवार का आरोप

राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने 82 पन्नों की चार्जशीट में निष्कर्ष निकाला कि अनीश की मौत उनके घर की दूसरी मंजिल से गिरने के कारण हुई।

हालांकि, परिवार इस निष्कर्ष को सिरे से खारिज करता है और इसे सुनियोजित हत्या बताता है। अनीश के पिता सलेम खान के मुताबिक, घटना वाली रात करीब 1:10 बजे पुलिस वर्दी और सिविक वॉलंटियर के कपड़ों में कुछ लोग उनके घर में दाखिल हुए। अमता थाने को सूचना देने के बावजूद पुलिस को पहुंचने में करीब सात घंटे लग गए। परिवार का आरोप है कि फॉरेंसिक टीम 48 घंटे बाद पहुंची, जिससे अहम सबूत नष्ट हो गए। SIT ने बाद में हत्या की धारा हटाकर भारतीय दंड संहिता की धारा 304A (लापरवाही से मौत) और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाईं। मामले में नामित होमगार्ड काशीनाथ बेड़ा और सिविक वॉलंटियर प्रीतम भट्टाचार्य समेत सभी आरोपी जमानत पर रिहा हो चुके हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच फॉरेंसिक तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष ढंग से की गई। “यह पाया गया कि उनकी मौत ऊंचाई से गिरने के कारण हुई। मामला अदालत में है, इसलिए इससे अधिक कुछ नहीं कह सकता,” एक अधिकारी ने बताया।

आर्थिक और मानसिक संकट

अनीश की मौत ने परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है। साबिर खान, जो पहले सिक्किम में सेना के मेस में एक थर्ड पार्टी के जरिए काम करते थे, को बार-बार कोर्ट में पेशी के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी। “हर हफ्ते तारीख पड़ती थी। छह महीने बाद मुझे सूचित किया गया कि अब मेरी सेवा की जरूरत नहीं है। अब खेती-बाड़ी से जो थोड़ा बहुत मिलता है, उसी से आठ सदस्यीय परिवार का गुजारा हो रहा है,” उन्होंने कहा। परिवार की उम्मीदें अनीश से जुड़ी थीं, जो एक होनहार छात्र कार्यकर्ता थे। “अनीश के जाने के बाद सब कुछ बदल गया। अगर वह जिंदा होते तो हमारी जिंदगी अलग होती,” साबिर ने कहा। साबिर ने राजनीतिक मंच के जरिए आवाज उठाने की कोशिश में वाम मोर्चा के टिकट पर पंचायत चुनाव भी लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली

‘भूलती जा रही आवाजें’

परिवार का मानना है कि राज्य में हुई अन्य घटनाओं—जैसे आरजी कर अस्पताल कांड और जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्र की मौत—की तरह उनके मामले में भी कई सवाल अनुत्तरित रह गए हैं। “यह एक योजनाबद्ध हत्या थी। मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान में हमने साफ तौर पर पुलिस पर आरोप लगाया, लेकिन कुछ नहीं हुआ,” साबिर ने कहा। 4 साल बाद भी न्याय की राह लंबी और धुंधली नजर आ रही है। जहां बाकी दुनिया आगे बढ़ चुकी है, वहीं खान परिवार की जिंदगी फरवरी 2022 की उस रात में ठहर गई है।“एक मौत ने पूरे परिवार की जिंदगी की दिशा बदल दी। अब तो जीने का मकसद भी खो गया है,” साबिर की आवाज में आज भी वही दर्द झलकता है।

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