वचन भंग की सजा

मॉरीशस की लोक कथा
मॉरीशस की लोककथा
पीटर बोथसांकेतिक चित्र इंटररनेट से साभार
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बहुत पुरानी बात है। स्यन्तक नाम का एक ग्वाला था। वह अपने माता पिता के साथ

बड़ी गरीबी के दिन गुजार रहा था। सुबह-सुबह वह अपनी गायों को लेकर जंगल के उस

पार चला जाता और शाम होने पर लौटता।

एक दिन दूध न बिकने के कारण वह काफी दूर निकल गया। चारों तरफ अंधेरा फैल

गया और लौटते-लौटते रात हो गई। भूखा-प्यासा जंगल में रास्ता भूल गया। बहुत देर

तक भटकने के बाद वह एक तालाब के किनारे लेट गया। लेटते ही उसे नींद आ गईं।

आधी रात को संगीत की आवाज से उसकी आंख खुल गई। उसने देखा तालाब के चारों

तरफ खूब रोशनी है। ठंडी हवा चल रही है और संगीत की आवाज आ रही है।

आश्चर्यचकित स्यन्तक उठ बैठा। तालाब के उस पार बहुत सी परियां नाच गा रही थीं

और बीच में सिंहासन पर एक सुनहरे परों वाली रानी परी बैठी थी।

स्यन्तक के उठते ही सारी परियां रुक गईं। सुनहरी परी स्यन्तक के पास आई। उसे

देख कर डर के मारे वह कांपने लगा। बड़ी कठिनाई से उसने परी को जंगल में रूकने

का कारण बताया। उसकी दशा पर दया करके परी ने कहा, ’तुम हर रोज यहां आकर

नाच-गाना देख सकते हो परंतु यह बात कभी किसी को बताना नहीं। अगर बता दिया

तो तुम्हारा शरीर पत्थर का हो जाएगा।

सुबह होने पर सारी परियां आसमान में उड़ गईं। स्यन्तक भी घर चला आया। अब वह प्रतिदिन दूध बेच कर रात को जंगल में ही रुक जाता। उसके माता-पिता को घर न आने का कारण पूछते। पर वह कुछ नहीं बताता। धीरे-धीरे यह बात सारे गांव में फैल गई कि स्यन्तक रात को घर नहीं आता। गांव के बड़े-बूढ़ों ने उसके माता-पिता को समझाया कि इसकी शादी कर दो। गृहस्थी होने पर स्वयं ही घर लौट आया करेगा ।

स्यन्तक की शादी दूसरे गांव में तय हो गई। निश्चित दिन बारात धूम धाम से चल दी।

’पीटर बोथ‘ की पहाड़ी पर पहुंचते-पहुंचते रात हो गई। अतः सारी बारात ने वहीं डेरा

डाल दिया। स्यन्तक के मित्र उसे घेर कर बैठ गए और उसके रात को घर न आने का

कारण पूछने लगे। पहले तो वह टालता रहा पर फिर उससे नहीं रहा गया। उसने सोचा

इतने दिनों का साथ होने के कारण अब परियां तो कुछ कहेंगी नहीं, इस लिए इन मित्रों

को बता देता हूं।

वह आराम से पहाड़ी पर बैठ गया और अपनी बात कहने लगा। अभी वह कह भी नहीं

पाया था कि बड़ी तेज बिजली चमकी और जोर से गड़गड़ाहट हुई। सभी सहम गए। होश

आने पर सबने देखा कि स्यन्तक का शरीर पत्थर में बदल गया था।

आज भी मारीशस में पीटर बोथ की पहाड़ी पर आदमी के शरीर के आकार में पत्थर की

शिला दूर से ही देखी जा सकती है। तभी से इस पहाड़ी को गुडि़या पहाड़ी भी कहा जाने

लगा। स्यन्तक अपना वचन भंग करने की सजा आज भी भोग रहा है।

गुरिन्द्र भरतगढ़िया (उर्वशी)

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