

फिल्म ‘कांटे’, ‘मुसाफिर’, ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्मों के निर्देशक और निर्माता संजय गुप्ता का निधन हो गया। वर्सोवा स्थित अपने घर में गिरने से उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी। अत्यधिक खून बहने के कारण शनिवार आधी रात उनका निधन हो गया। वह 59 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी अनुराधा और दो बच्चे हैं।
मुंबई पुलिस के अनुसार, रात में घर के सभी सदस्य सो रहे थे, इसलिए घटना की जानकारी सुबह मिली। परिवार ने किसी तरह की आशंका या शिकायत नहीं जताई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और वर्सोवा पुलिस दुर्घटनावश मौत के मामले की जांच कर रही है। उनका अंतिम संस्कार शाम 7:30 बजे वर्सोवा श्मशान घाट पर होगा।
संजय गुप्ता के निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उनके करीबी सहयोगी संजय दत्त और जॉन अब्राहम के अलावा काजोल, कंगना रनौत और दीया मिर्जा ने सोशल मीडिया पर दुख जताया। फिल्म निर्माता मिलाप जावेरी, राकेश रोशन और अभिनेता रोहित रॉय, रोनित रॉय, सोनू सूद, मनोज बाजपेयी तथा फरदीन खान भी उनके घर पहुंचे।
मुंबई में जन्मे गुप्ता को कॉलेज के दिनों से ही कहानी कहने में दिलचस्पी थी। उन्होंने 1985 में टीवी सीरियल ‘करमचंद’ और 1987 की फिल्म ‘जलवा’ में फिल्मकार पंकज पराशर के साथ काम शुरू किया। बाद में राज सिप्पी के साथ ‘शहजादे’, ‘महादेव’ और ‘थानेदार’ जैसी फिल्मों से जुड़े।
1994 में उन्होंने संजय दत्त, अतुल अग्निहोत्री और आदित्य पंचोली अभिनीत फिल्म ‘आतिश: फील द फायर’ से निर्देशन की शुरुआत की। इस फिल्म से संजय दत्त के साथ उनकी लंबी दोस्ती और पेशेवर साझेदारी शुरू हुई।
इसके बाद उन्होंने ‘राम शास्त्र’, ‘हमेशा’, ‘जंग’ और ‘खौफ’ जैसी फिल्में बनाईं। 2002 में आई ‘कांटे’ उनके करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हुई। अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, महेश मांजरेकर, कुमार गौरव और लकी अली अभिनीत इस क्राइम थ्रिलर को उसके अभिनय, एक्शन और कहानी के लिए सराहना मिली थी। फिल्म क्वेंटिन टैरेंटिनो की ‘रिजरवॉयर डॉग्स’ से प्रेरित थी।
संजय दत्त ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए बताया कि दोनों हाल ही में ‘कांटे 2’ बनाने पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने लिखा कि वह संजय गुप्ता के इस सपने को पूरा करने की पूरी कोशिश करेंगे।
‘कांटे’ के बाद गुप्ता ने ‘मुसाफिर’ और ‘जिंदा’ जैसी फिल्में बनाईं। ‘जिंदा’ दक्षिण कोरियाई फिल्म ‘ओल्डबॉय’ का रूपांतरण थी। इसी फिल्म से जॉन अब्राहम के साथ उनका जुड़ाव शुरू हुआ।
उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी व्हाइट फेदर फिल्म्स भी स्थापित की। निर्माता और पटकथा लेखक के तौर पर वह ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ (2007) से जुड़े थे। फिल्म में 1991 के मुंबई के लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स पुलिस एनकाउंटर को दिखाया गया था। इसके बाद उन्होंने ‘शूटआउट एट वडाला’ (2013) का निर्देशन किया, जो गैंगस्टर मान्या सुर्वे के जीवन पर आधारित थी।
गुप्ता ने अपराध की कहानियों के अलावा ‘जज्बा’ (2015) और ‘काबिल’ (2017) जैसी फिल्मों का भी निर्देशन किया। ‘मुंबई सागा’ (2021) के जरिए उन्होंने फिर मुंबई के अपराध जगत की कहानी पर्दे पर उतारी।
हाल के वर्षों में उन्होंने ‘द मिरांडा ब्रदर्स’ (2024) का निर्देशन और ‘विस्फोट’ (2024) का निर्माण किया। सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी वह काफी सक्रिय थे और उनके करीब 1.7 लाख फॉलोअर्स थे। वह अक्सर फिल्मों, मनोरंजन जगत और समसामयिक मुद्दों पर अपनी राय साझा करते थे।